सुलतानपुर : धोखाधड़ी मामले में कोर्ट सख्त, पुलिस को अग्रिम विवेचना का आदेश

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Edited By Amrit Vichar
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सुलतानपुर, अमृत विचार। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नवनीत की अदालत ने धोखाधड़ी समेत अन्य आरोपों में दो आरोपियों को क्लीन चिट देने पर गंभीर रुख अपनाते हुए कोतवाली नगर पुलिस को अग्रिम विवेचना कराने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि विवेचक ने अत्यंत सरसरी एवं उपेक्षापूर्ण ढंग से जांच की और सह-अभियुक्त योगेंद्र सिंह एवं सुरेंद्र कौर का नाम जानबूझकर विवेचना से हटा दिया। 

कूरेभार थानाक्षेत्र के निदूरा निवासी वादी उदय कुमार कोविद की ओर से दायर अर्जी में कहा गया था कि राम नायक पाण्डेय, योगेंद्र सिंह और सुरेंद्र कौर पर समान आरोप लगे थे। पोस्ट डेटेड चेक भी योगेंद्र सिंह द्वारा दिए गए थे, इसके बावजूद विवेचक ने केवल राम नायक पाण्डेय के विरुद्ध ही आरोप पत्र दाखिल किया।

वादी की ओर से 17 सितंबर 2023 को कोतवाली नगर में खालसा रियल स्टेट कम्पनी लिमिटेड, गोमती नगर लखनऊ के निदेशक योगेंद्र सिंह, सुरिन्दर कौर और सेल्स मैनेजर रामनायक पांडेय के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। अदालत ने केस डायरी व प्रस्तुत प्रपत्रों के परीक्षण में पाया कि निदेशक योगेंद्र सिंह द्वारा प्रस्तुत दो दस्तावेज संदिग्ध प्रतीत होते हैं। 

इनकी तारीख एवं हस्ताक्षर की स्याही का वैज्ञानिक परीक्षण कराना आवश्यक था, जो जांच में नहीं किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी एक साझेदार द्वारा दूसरे के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर से अन्य निदेशकों की जिम्मेदारी स्वतः समाप्त नहीं होती। कोर्ट ने अग्रिम विवेचना की अर्जी स्वीकार करते हुए थाना कोतवाली नगर को पुनः विवेचना करने व सभी आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए 5 दिसंबर की तारीख नियत की है।

दरोगा सिपाही समेत तीन आरोपियों को कोर्ट ने किया तलब

सुलतानपुर: गाड़ी चेकिंग के दौरान मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोपों के मामले में चांदा के  तत्कालीन उपनिरीक्षक अमरनाथ, सिपाही धीरेन्द्र और इस्लामुद्दीन को एसीजेएम शुभम वर्मा ने तलब कर सुनवाई के लिए 10 जनवरी की तारीख नियत की है। चांदा थानाक्षेत्र के प्रतापपुर कमैचा निवासी परिवादी संतोष कुमार पाण्डेय ने अधिवक्ता मुन्ना चौबे के जरिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि 13 नवंबर 2018 को वह अपने 10 वर्षीय पुत्र को तेज बुखार व कान दर्द के इलाज के लिए लम्भुआ अस्पताल ले जा रहे थे।

इसी दौरान चांदा थाने के सिपाही धीरेन्द्र ने उनकी गाड़ी रोककर अभद्रता की। आरोप है कि उपनिरीक्षक अमरनाथ के पहुंचने पर बिना पूछताछ किए परिवादी को मुक्का मारा, जिससे वह अपने बच्चे सहित गिर पड़े और उन्हें गंभीर चोटें आईं।आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन थाने ले जाकर हिरासत में भी मारपीट की, जिसके कारण उनके कान से खून निकला और शरीर के विभिन्न हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं।

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