आउटसोर्स सेवा निगम बना... नियमावली और कार्यान्वयन तंत्र नहीं, यूपी सरकार की मंजूरी के बाद भी प्रावधान फाइलों में कैद
शोषण से जूझ रहे लाखों संविदा कर्मियों को प्रक्रिया-निर्धारण का इंजतार
लखनऊ, अमृत विचार। योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी आउटसोर्स सेवा निगम की नियमावली और कार्यान्वयन तंत्र अधूरा पड़ा है। इस देरी की वजह से लाखों संविदा आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति, मानदेय, सुविधाओं के मसले अनसुलझे हैं। पुराने एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों को वेतन, ईपीएफ-ईएसआई योगदान, सेवा-शर्त-सुरक्षा आदि में तमाम शिकायतें हैं। नए ढांचे के लागू न होने से ये समस्याएं लंबित बनी हुई हैं।
प्रदेश सरकार ने सितंबर में आउटसोर्सिंग सेवाओं के लिए एक बड़े कदम के रूप में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम को कैबिनेट की मंजूरी दी। तीन वर्ष की अवधि के लिए संविदा नियुक्ति, निर्धारित सेवा-दिन, बैंक खाते में सीधा भुगतान, ईपीएफ-ईएसआई जैसी सोशल-सिक्योरिटी का प्रावधान था, लेकिन अभी तक निगम का गठन पूरी तरह नहीं हुआ है। इसकी नियमावली, प्रक्रिया-निर्धारण, एजेंसी-चयन की रूपरेखा अभी अधूरी पड़ी है। अभी तक कंपनी पंजीकरण, महानिदेशक-नियुक्ति जैसे आधिकारिक कदम पूरी तरह नहीं हुए हैं।
आउटसोर्सिंग माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा कर्मियों का कहना है कि वे अब भी एजेंसियों के भरोसे हैं। मानदेय समय पर नहीं मिलता, सेवा-शर्तें स्पष्ट नहीं हैं, सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान लागू नहीं हो पाए हैं। उदाहरण के रूप में नई व्यवस्था लागू होने तक उनका वेतन 16-20 हजार रुपये तय है, लेकिन यह अभी अधिकांश जगहों पर क्रियात्मक नहीं हुआ है। ऐसी संविदा स्थिति में लंबे समय तक काम कर रहे कर्मियों में असमर्थता, असमय सेवा-छंटनी, मानदेय में देरी और सामाजिक सुरक्षा-लाभ की कमी जैसी चिंताएं बढ़ रही हैं। दूसरी ओर सरकार कह रही है कि पंजीकरण व औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं, इसके बाद विभिन्न विभागों में प्रक्रिया शुरू होगी।
जो तय हो चुका है-
• निगम को कंपनीज एक्ट 2013 की धारा-8 के अंतर्गत पब्लिक-लिमिटेड, नॉन-प्रॉफिट संस्था के रूप में गठित करने की कैबिनेट ने मंजूरी दी।
• आउटसोर्स कर्मियों के लिए मानदेय 16,000-20,000 रुपये प्रति माह तय किया गया है।
• तीन वर्ष की अवधि के लिये संविदा नियुक्ति का प्रावधान है।
• चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा/साक्षात्कार शामिल करने का प्रस्ताव है।
• एजेंसियों का चयन निष्पक्षता हेतु जेम पोर्टल के माध्यम से करने का निर्णय।
• ईपीएफ और ईएसआई का अधिकार आउटसोर्स कर्मियों को सुनिश्चित किया जाना है।
• शैक्षिक अर्हता, स्थानीय निवासी प्राथमिकता जैसे नियम भी बदले गए हैं।
क्या अभी स्पष्ट नहीं मिला
• नियमावली का पूरा मसौदा शासन ने सार्वजनिक नहीं किया है।
• विभाग-वार भूमिका, नियम-उल्लंघन पर दंड, श्रेणियों के अंतर्गत पद-विभाजन-मानदेय का पूरा विवरण नहीं।
• कब से लागू होगा नियमावली, कब तक सभी विभागों में व्यापक रूप से प्रभावी होगा, इसकी समयसीमा स्पष्ट नहीं।
• आउटसोर्स एजेंसियों एवं निगम के भीतर निदेशक मंडल, प्रबंधन-संरचना आदि का पूरा गठन एवं नियमावली का ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं।
