बरेली: नाथ नगरी आध्यात्मिक व एकता की भूमि

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Edited By Pradeep Kumar
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नाथ कॉरिडोर से पर्यटन नक्शे पर बरेली को मिलेगी आध्यात्मिक नगरी की पहचान

काशी और अयोध्या की तर्ज पर बरेली के सात नाथ मंदिरों को पर्यटन के नक्शे पर पहचान दिलाने के लिए नाथ कॉरिडोर का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। कॉरिडोर के अंतर्गत बरेली शहर की चारों दिशाओं की मुख्य सड़कों पर कॉरिडोर को दर्शाते हुए भव्य द्वार बनाए गए हैं। कॉरिडोर बनने से बरेली शहर के नाथ मंदिरों के साथ ही हर बरेलियंस को नई पहचान मिलेगी। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल इंडस्ट्री से लेकर तमाम वर्गों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। रोजगार के भी साधन बढ़ेंगे। इसके साथ नाथनगरी में सभ्यता की 5000 साल पुरानी गाथा भी शहर में गूंजेगी। शहर में बनाई जा रहीं 19 फोकस वॉल पर  भित्ति कला प्रदर्शित होगी। इससे बरेली सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी भी बनेगी। 

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बरेली शहर के धोपेश्वरनाथ मंदिर, पशुपतिनाथ मंदिर, वनखंडीनाथ मंदिर, अलखनाथ मंदिर, तपेश्वरनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर व मढ़ीनाथ मंदिर के साथ रामनगर ब्लॉक के अहिच्छत्र क्षेत्र में श्रद्धालुओं को हर वो सुविधाएं दी जाएं, जिनसे पर्यटक आकर्षित हों, इसको ध्यान में रखते हुए नाथ कॉरिडोर की रूपरेखा तैयार की गई। नाथ मंदिरों की भव्यता और पौराणिक इतिहास को दर्शाते हुए पर्यटकों को इस ओर आकर्षित करने के लिए पर्यटन विभाग ने कार्ययोजना तैयार की। नाथ कॉरिडोर को राज्य सरकार ने 2023 में मंजूरी दी थी। इसके बाद बीडीए से प्रपोजल मांगा गया। जून, 2023 में बीडीए ने 70 पेज की डीपीआर बनाकर शासन को भेजी।

अब करीब 231 करोड़ रुपये से नाथ कॉरिडोर के निर्माण कार्यों को कराया जा रहा है। कॉरिडोर के अंतर्गत सात नाथ मंदिरों को आने-जाने वाली सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को मिली है। करीब 36 करोड़ से सड़कें बनेंगी। वहीं, बाबा वनखंडी नाथ मंदिर में करीब पांच करोड़ रुपये, तपेश्वरनाथ मंदिर में 8.36 करोड़ रुपये, धोपेश्वरनाथ मंदिर में करीब 7 करोड़ रुपये, अलखनाथ मंदिर में करीब 11.50 करोड़ रुपये से कार्य होंगे। नाथ कॉरिडोर के अंतर्गत  तुलसी मठ में करीब 9.71 करोड़ रुपये से कार्य होंगे। मठ का प्रवेश द्वार बनेगा। स्टोर, भंडार गृह, धर्मशाला बनेगी। वैदिक लाइब्रेरी सहित अन्य कार्य होंगे। 

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भित्ति कला से बरेली बनेगी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजना से नाथ नगरी बरेली अब सांस्कृतिक-आध्यात्मिक कला के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित होने जा रही है। शहर के प्रमुख चौराहों, मार्गों, धार्मिक स्थलों और सरकारी परिसरों में 19 भव्य फोकस वॉल का निर्माण होगा। भित्ति वॉल पर भारत की प्राचीन सभ्यता, नाथ परंपरा, महाभारतकालीन इतिहास और स्थानीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों का संगम का शानदार प्रदर्शन होगा। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप युवाओं को भारत के गौरवशाली अतीत, प्राचीन और समृद्धशाली संस्कृति से परिचय करायेगी। युवाओं और पर्यटकों को बरेली के 5000 वर्ष पुराने इतिहास और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

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फोकस वॉल का विचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस परिकल्पना से प्रेरित है, जिसमें उत्तर प्रदेश की सभ्यता को ग्लोबल टूरिज्म मॉडल से जोड़कर रोजगार, पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ाना शामिल है। इन फोकस वॉल पर बनने वाले भित्ति-चित्र अजंता-एलोरा की शैली पर आधारित होंगे। इन चित्रों में भगवान शिव के त्रिशूल और डमरू, नाथ योगियों के प्रतीक, देवी-देवताओं की आकृतियां, बरेली की आध्यात्मिक पहचान, महाभारतकालीन नगर की विरासत और स्थानीय लोककला को जीवंत कलात्मक स्वरूप दिया जाएगा।

पर्यटन विभाग ने सर्वे करने के बाद ऐसे स्थानों को चुना है। जहां से सबसे ज्यादा पर्यटक और राहगीर गुजरते हैं। इस परियोजना पर कुल 621.33 लाख रुपये (लगभग 6 करोड़ 21 लाख 33 हजार रुपये) खर्च किए जाएंगे। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि बरेली केवल झुमके तक ही सीमित नहीं है। यह योगियों, सिद्ध–नाथों, ऋषि-मुनियों और प्राचीन सभ्यता का नगर है। फोकस वॉल आने वाली पीढ़ियों को बरेली की असली आत्मा से परिचित कराएगी। यह न सिर्फ शहर के सौंदर्यीकरण की योजना है, बल्कि बरेली के सांस्कृतिक पुनरुद्धार और पर्यटन अर्थव्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

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सातों नाथ मंदिरों का नाथ सर्किट बनाने का उद्देश्य
एक नाथ मंदिर से दूसरे नाथ मंदिर तक यात्रा को आसान बनाने और पूरे सर्किट में सुरक्षित और उचित सुविधाएं प्रदान करने का प्रस्ताव नाथ सर्किट में शामिल किया हैं। इसमें कनेक्टिविटी और सुगमता में सुधार के लिए आईपीटी और अन्य सार्वजनिक परिवहन जोड़े गए हैं। मंदिरों तक पैदल आवागमन को सुगम बनाने के लिए चौड़ी सड़कों पर फुटओवर ब्रिज बनेंगे। आगंतुकों के लिए पार्किंग क्षेत्र होगा। पहचान में सुधार के लिए संकेतों और अन्य दृश्य चिह्नों का उपयोग होगा। नाथ नगरी सर्किट की पहचान सभी नाथ मंदिरों के जुड़ाव को ध्यान में रखकर की गई है।

प्रत्येक नाथ मंदिर में इतनी सुविधाएं होंगी - प्रवेश मार्ग, आंतरिक सड़क विकास, फुटपाथ, स्टॉल, स्ट्रीट लाइटिंग, साइनेज, कूड़ेदान, स्ट्रीट फर्नीचर, भूनिर्माण, भूमिगत संग्रहालय भवन, पार्किंग, पर्यटक सुविधाएं, खोया-पाया सुविधा, प्राथमिक चिकित्सा, पुलिस बूथ, पेयजल, सूचना कियोस्क।

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6.21 करोड़ से शहर में 19 स्थानों पर फोकस वाल बनेगी
नाथ कॉरिडोर के तहत शहर में 19 स्थानों पर फोकस वाल बनाने की योजना है। 6.21 करोड़ रुपये से कार्य कराए जाएंगे। फोकस वाल का आठ स्थानों पर निर्माण शुरू करा दिया गया है। इसमें पेटिंग, डिजाइन और पौराणिक कलाकृतियों को दीवार पर उकेरा जाएगा। मनोहर भूषण इंटर कॉलेज ग्राउंड, एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय, सुरेश शर्मा नगर चौराहा, डीडी पुरम पार्क, नियर स्टेडियम, कुदेशिया अंडरपास, बीसलपुर चौराहा, विकास भवन चौराहा, आयुक्त कार्यालय, उद्योग विभाग कार्यालय, त्रिवटी नाथ मंदिर मैकेनियर रोड, 100 फुटा तिराहा आदिनाथ चौक, इन्वर्टिस तिराहा बड़ा बाइपास, रेलवे स्टेशन, मिनी बाइपास इज्जतनगर रेलवे स्टेशन, झुमका तिराहा, और पर्यटन कार्यालय रोहिला होटल वॉल।

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नाथ कॉरिडोर के मंदिरों की दूरी
- धोपेश्वरनाथ से पशुपति नाथ मंदिर-8.2 किमी
- पशुपतिनाथ मंदिर से बनखंडी नाथ-3.0 किमी
- वनखंडीनाथ मंदिर से त्रिवटीनाथ मंदिर-7.0 किलोमीटर
- त्रिवटीनाथ मंदिर से मढ़ीनाथ मंदिर-3.2 किलोमीटर
- अलखनाथ मंदिर से मढ़ीनाथ मंदिर-3.5 किलोमीटर
- मढ़ीनाथ मंदिर से तपेश्वरनाथ मंदिर-2.5 किलोमीटर
- तपेश्वरनाथ मंदिर से धोपेश्वरनाथ मंदिर-5.8 किलोमीटर

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त्रिवटी नाथ मंदिर के पुजारी रवीन्द्र शर्मा बताते हैं 1476 विक्रम संवत में जंगल में चरावाह आया वह वट वृक्ष के नीचे सो रहा था। तब बाबा ने उसे जगाया और अपने यहां होने की बात कही। चरावाहे ने बाबा के प्रकट होने की बात आसपास के लोगों को बताई। इसके बाद तो यहां जनसैलाब उमड़ पड़ा। खुदाई के बाद यहां शिवलिंग प्रकट हुआ। जैसे जैसे सभ्यता और संस्कृति का प्रचार हुआ। उसका बढ़ना शुरु हुआ त्यों त्यों मंदिर का स्वरूप भी बढ़ता गया। इस समय मंदिर में पुरातन सिद्धहस्त शिवलिंग है ही साथ ही मंदिर के स्वरूप को भव्यता प्रदान करने वाले भोलेशंकर के तांबे की भव्य आकृतियां भी है। जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का मन मोह लेती हैं।  प्रदेश सरकार ने बरेली को नाथ नगरी के रूप में विकसित किया है। यह पुरातन मंदिर भी नाथनगरी कॉरीडोर का हिस्सा है और यहां कारीडोर के तहत निर्माण कार्य चल रहा है।

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अलखनाथ मंदिर के महंत और आनंद अखाड़े के सचिव कालू गिरी बताते हैं कि यह मंदिर मुगलों के समय का है। मुगलों ने भी कई बार यहां हिन्दू मंदिरों के प्रति अपनी दुर्भावना का प्रदर्शन किया लेकिन सफल नहीं हो पाए। वे बताते हैं कि मुगलों के बाद राजा महाराजा आए। उनके समय भी यहां रहने वाले बाबा अलख जगाते थे। राजा महाराजा यह सेवा देखते आ रहे थे। तब बाबा ने राजाओं से जमीन देने को कहा तो राजा ने जमीन दान दी थी। वे बताते हैं कि सनातन तो मानता ही रहा है साथ ही नवाबों अंग्रेजों ने भी नागाओं के प्रभाव को माना है। नाथ संप्रदाय की जड़ें बरेली में बहुत गहरी हैं।

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