धांधली के आरोप पर LUACTA अध्यक्ष ने संभाला मोर्चा, संगठन के नियमों के तहत ही हुआ चुनाव
निर्धारित तिथि तक सदस्यता शुल्क लेने के बाद मतदाता बनते हैं सदस्य
लखनऊ, अमृत विचार : लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक संघ (लुआक्टा) के चुनाव में धांधली के आरोप और शिकायत दर्ज होने के बाद अध्यक्ष मनोज पाण्डेय ने मोर्चा संभाल लिया है। लगातार पांचवीं बार अध्यक्ष बने डॉ. मनोज पाण्डेय ने शिक्षकों के ऑनलाइन समूह में लगाए जा रहे आरोपों पर स्पष्टीकरण दिया है। उनका कहना है कि पहले यह समझना जरूरी है कि लुआक्टा के चुनाव की प्रक्रिया अन्य विश्वविद्यालयों के संगठनों से अलग है। लुआक्टा में जो शिकायत कर रहे हैं, उनके पार्टी की थीम ही “सब वोट चोर है” बताई जा रही है। उनके नेता लुआक्टा में दो बार चुनाव हारने के बाद लुआक्टा के लिए आरक्षित पद—कार्यालय सचिव—जिसे संगठन ने उन्हें निर्विरोध दिया था, उसे लेकर बैठे हैं।
लुआक्टा अध्यक्ष डॉ. मनोज पाण्डेय का कहना है कि लुआक्टा में सदस्यता शुल्क सदैव बैंक के खाते में ही जमा होता है और इसकी तिथि कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित की जाती है। निर्धारित तिथि के बाद न तो शुल्क लिया जाता है और न ही मतदाता सूची में नाम शामिल होता है। निर्धारित अवधि के बाद मतदाता सूची तैयार की जाती है और उस पर आपत्तियां भी आमंत्रित की जाती हैं। आपत्तियों के निराकरण के बाद मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाता है।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ था चुनाव
वर्ष 2008 में लुआक्टा के एक पदाधिकारी, जो अल्पसंख्यक समुदाय से थे, निर्धारित समयावधि में सदस्यता शुल्क जमा नहीं कर पाए थे। इस कारण उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ। चुनाव में भाग लेने के लिए उन्होंने अल्पसंख्यक आयोग में मुकदमा दायर किया, जिसके बाद आयोग ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी। लुआक्टा का चुनाव उच्च न्यायालय के आदेश पर कराया गया, लेकिन तब भी वे न तो सदस्य बन सके और न ही चुनाव में भाग ले पाए।
