लव बर्ड्स: वो दोस्त जो जीवनसाथी बन गया

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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दोस्ती-एक ऐसा रिश्ता जो धीरे-धीरे जीवन की सबसे मजबूत नींव बन जाता है। कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ। मुझे आज भी याद है, 2009 की बात है, जब मैं केमिस्ट्री की कोचिंग कर रही थी। हमारी क्लास में एक लड़का था, हमेशा शांत, विनम्र और पढ़ाई में अव्वल। वहीं मैं स्वभाव से काफी चंचल थी। हमारी कोचिंग के दिनों में हम दोनों के बीच लगभग कोई बातचीत नहीं होती थी। कोचिंग पूरी होने के बाद मैं बीएससी करने चली गई और वह भी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया। अचानक एक दिन हमारी मुलाकात हुई और वहीं से हमारी दोस्ती की शुरुआत हुई। समय के साथ यह दोस्ती गहरी होती गई और हम अपनी छोटी-बड़ी सभी बातें एक-दूसरे से साझा करने लगे।

इसी दौरान मेरी बड़ी बहन, जिन्हें ब्रेन ट्यूमर था, उनका ऑपरेशन दिल्ली के एम्स में होना था। उस समय मेरे साथ केवल दो बहनें थीं-एक जो बीमार थीं और दूसरी जो मेरा सहारा बनी हुई थीं। वहां छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी हमें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। यह बात मैं अक्सर अपने दोस्त से साझा करती थी। शायद उसे महसूस हुआ कि हम वहां अकेले संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए उसने अपने घर पर झूठ बोलकर दिल्ली पहुंचने का फैसला कर लिया। दिल्ली पहुंचकर उसने मेरी बड़ी बहन के साथ मिलकर सारा काम संभाल लिया। 

ऑपरेशन सफल रहा और मेरी बहन पूरी तरह ठीक हो गई। इस घटना के बाद हमारी दोस्ती और मजबूत हो गई। वह मेरे घर आने-जाने लगा और देखते ही देखते हमारे परिवार का एक अभिन्न हिस्सा बन गया। इसी बीच मेरे शादी के रिश्तों की बातचीत भी चल रही थी। घर में पापा की सबसे छोटी और सबकी लाडली होने के कारण सभी मेरे लिए बेहतर से बेहतर रिश्ता ढूंढने में लगे थे। लेकिन मेरे मन में लगातार एक डर था कि कहीं मेरा विवाह ऐसी जगह न हो जाए जहां मैं अपनी तरह से जीवन न जी सकूं। कई रिश्ते आते-जाते रहे, और मैं लगातार उलझन में डूबी रही। 

एक दिन, इसी उधेड़बुन में, मैंने अपने दोस्त से पूछा- “अगर तुम्हारे जीवन में कोई और नहीं है। तो क्या तुम मुझसे शादी करोगे?” वह कुछ क्षणों के लिए सक्त रह गया। फिर बोला-“मुझे थोड़ा समय दो… मैंने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं।”

मैंने उसका उत्तर पाने के लिए इंतजार किया। मगर हमारे बीच एक बड़ी बाधा थी-जाति। वह ठाकुर था और मैं कायस्थ। कई उतार-चढ़ाव आए, कई बार स्थितियां मुश्किल हुईं, लेकिन अंततः हमने हिम्मत दिखाई। मैंने अपने परिवार को और उसने अपने परिवार को इस रिश्ते के लिए मनाया। लंबी कोशिशों और अनेक भावनात्मक संघर्षों के बाद, 22 फरवरी 2022 को हमारी शादी धूमधाम से संपन्न हुई। आज भी हम पहले की तरह ही अच्छे दोस्त हैं। हमारी दोस्ती ही हमारा सबसे मजबूत रिश्ता है-वही दोस्ती जो सम्मान, भरोसे और साथ से पति-पत्नी के सुंदर बंधन में बदल गई।