UP : लंदन पहुंची महाकुंभ की गाथा, मेयर ने किया पुस्तक का विमोचन
बदायूं, अमृत विचार। भारत के सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन महाकुंभ की गाथा लंदन तक पहुंची है। पर्यावरणविद, वाटर वूमेन के नाम से प्रसिद्ध और पंचतत्व फाउंडेशन की संस्थापक शिप्रा पाठक की महाकुंभ के कार्यों पर लिखी पुस्तक के अंग्रेजी संस्करण का लंदन की मेयर ने विमोचन किया। शुक्रवार को शिप्रा पाठक ने लंदन की संसद को संबोधित किया था। ब्रिटिश सांसदों ने उनके मॉडल की सराहना की थी।
लंदन में भारतीय संस्कृति का एक ऐतिहासिक क्षण उस समय दर्ज हुआ जब लंदन बरो ऑफ हैरो की मेयर ने शिप्रा पाठक की लिखी पुस्तक महाकुंभ के अंग्रेजी संस्करण का विमोचन किया। यह पुस्तक महाकुंभ की दिव्यता, इसकी सांस्कृतिक निरंतरता और नदी-आधारित भारतीय दर्शन के अद्भुत स्वरूप को विश्व पटल पर स्थापित करती है। मेयर ने कहा कि महाकुंभ पुस्तक भारतीय सनातन परंपरा की गहराइयों से परिचित कराती है। शिप्रा ने जिस स्पष्टता से भारतीय नदी पूजन, संसद में भारतीय सनातन दर्शन और पर्यावरण चिंतन को प्रस्तुत किया है, वह सचमुच प्रेरणादायक है।
शिप्रा को लंदन मेयर कार्यालय ने प्रकृति संवाद के लिए विशेष आमंत्रण दिया था। यह सम्मान न केवल उनके पर्यावरणीय कार्यों की पहचान है, बल्कि भारतीय विचारधारा की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक भी है। विमोचन के दौरान 250 से अधिक प्रतियां उपस्थित ब्रिटिश नागरिकों और प्रवासी भारतीयों को दी गईं। जिन्होंने भारतीय सनातन संस्कृति से जुड़े रहने की उत्सुकता व्यक्त की। शिप्रा ने पुस्तक के बारे में कहा कि महाकुंभ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सामूहिक चेतना का प्रत्यक्ष दर्शन है।
इसके माध्यम से समझ पाएंगे कि कैसे करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती की शक्ति से ऊर्जित होकर हर हर महादेव की ध्वनि में पावन डुबकी लगाते हुए बिना किसी भेदभाव के अपने-अपने घर लौट जाते हैं। कहा कि उनकी संस्था पंचतत्व ने महाकुंभ के दौरान पर्यावरण संरक्षण के लिए लाखों थैले और थालियां वितरित की। जिससे स्वच्छता और प्लास्टिक-मुक्त अभियान को बड़ा प्रोत्साहन मिला। शिप्रा पाठक ने वहां के लोगों को भारत आने पर नर्मदा, गोमती, गंगा और देश की प्रमुख नदियों के दर्शन कराने का निमंत्रण भी दिया। लंदन में हुआ यह विमोचन न सिर्फ एक पुस्तक का अनावरण था, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति और पर्यावरणीय चेतना के वैश्विक प्रसार का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी बन गया।
