ये विरासत भी न हो जाए गुमनाम : दुर्लभ सामान सहेजने के शौकीन नवाब मसूद
नवाबी विरासत की झलक देखने एक दिन नवाब मसूद की हवेली पहुंचे। दुर्लभ सामान सहेजने के शौकीन नवाब अपने परंपरागत लिबास में थे। सिर पर टोपी और नवाबों सरीखा पहनावा। मुस्कराते हुए आगे बढ़े और हाथों से आदाब का इशारा किया। बैठने का संकेत हुआ तो कुर्सी संभाल ली। पूछा, चाय पिएंगे। हां कहते ही इशारा किया और चंद मिनटों में चाय के साथ बिस्कुट नवाबी मेज पर लग गई। चाय की चुस्कियां लेते हुए बात आगे बढ़ी और जमा की गई विरासत की ऐतिहासिक चीजों पर जाकर टिक गईं। उन्होंने लंबी सांस खींची और संजोई पुरखों की विरासत के पन्ने एक-एक कर खोलते चले गए। -दिव्यभान श्रीवास्तव, लखनऊ

नवाबी काल के पुराने सिक्के निकाले, तो हुक्का, पानदान, घड़ी और कुरान की आयतें भी प्लेटों पर उकेरी दिखी। जेहन पर जोर डालते हुए अपने पुरखों की विरासत का जिक्र करते हुए मानो वे पुराने दौर में खो से गए। उन्होंने कई फिल्मों का भी जिक्र किया। कहा ऐसे ही नहीं है पहचान हमारी। नवाब मसूद से अमृत विचार ने जब विरासत को लेकर उन्हें कुरेदा तो कई पुराने पन्ने स्वत: ही खुलते चले गए।

हमीं से की गईं लखनऊ में यूथ फेस्टिवल की शुरुआत नजाकत और नफासत के शहर लखनऊ में बनीं कई मशहूर फिल्मों में निर्माताओं ने नवाब मसूद को अभिनय का मौका दिया और इसके जरिए, उन्होंने अपने लखनवी अंदाज की छाप छोड़ी। वर्तमान में शिया पीजी कॉलेज में कॉमर्स के प्रोफेसर व कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज में पढ़े-लिखे नवाब मसूद अब्दुल्लाह कहते हैं कि उमराव जान, खुदा हाफिज, निशांची, लालबत्ती, हमारे-12, मिर्जापुर-2, गुलाबो-सिताबो, गदर, गदर-2, इश्क के परिंदे, मैडम चीफ मिनिस्टर, इश्कजादे समेत कई फिल्मों में अभिनय किया। नवाब मसूद अब्दुल्लाह लखनऊ के एक रईस और नवाबी खानदान के वंशज हैं, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं।

वह ‘अल-मसूद क्रिएशन सोसाइटी’ चलाते हैं, जो लखनवी चिकनकारी को बढ़ावा देने के लिए समर्पित हैं और न्यूयॉर्क जैसे विदेशों में भी प्रदर्शनियां लगा चुके हैं। उन्हें लखनऊ के पारंपरिक बोर्ड गेम ‘पचीसी’ खेलते हुए और दीपावली व होली की परंपराओं का पालन करते हुए भी देखा गया है। नवाब मसूद की बेगम जहां फैशन डिजाइनर हैं, वहीं उनकी तीनों संताने- दो बेटियां व बेटा मुंबई में है। बेटा फिल्म डायरेक्टर व नाटककार है। नवाब मसूद ने बेगम हजरत, जाने आलम, मटिया बुर्ज जैसे कई नाटकों में रोल प्ले किया है।

वो बताते हैं कि 1983 में लखनऊ महोत्सव में कला, संस्कृति और पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए यूथ फेस्टिवल की शुरुआत हमीं से की गईं, तब से आज भी वो प्रक्रिया जारी है। अंगूठी पर अकीक व कुरान की आयतें : प्रोफेसर नवाब मसूद ने दो-तीन अंगूठी पहनतें हैं, जिनमें अकीक, सीरिया, अमन कुरान की आयतें हैं। वह अंगूठी हमेशा उनको अल्लाह की याद दिलाती हैं और गलत कार्यों के रहमों-करम से बचाती है। फिरोजा व रूबी की अंगूठी तो खुद डिजाइन की हुई, उनके पास मौजूद है।

अवध की पहचान सदियों पुराने सिक्के
प्राचीन सिक्के 100-150 साल पहले (यानी 19 वीं सदी के मध्य में), लखनऊ के नवाब सोने, चांदी और तांबे के सिक्के इस्तेमाल करते थे, जिन्हें मुख्य रूप से अशरफी, रुपया और फलस कहा जाता था। अवध स्टेट नवाब गाजी-उद दिन हैदर, नासिर, मुहम्मद अली शाह, अजमद अली शाह, वाजिद अली शाह के दौर के नवाब मसूद के पास विरासत में मिले सदियों पुराने सिक्के हैं, जो कभी अवध की पहचान थे। ये सिक्के अपने आप में एक आयात है, जिनकी कीमत आज के जमाने में आंक पाना मुश्किल है। तांबे के क्वाइन भी हैं, जिन पर भी आयतें हैं।

नवाबों की लाइफ स्टाइल
कभी शानो-शौकत से जिंदगी जीने वाले मशहूर नवाबों की लाइफ स्टाइल भी अब बदलते दौर के साथ बदल गई है, लेकिन अपने पुरखों की विरासत को आज भी न सिर्फ सुनहरी यादों के तौर पर संजोए रखा है, बल्कि उससे उनका व्यवसाय भी चलता है। नवाब मसूद ने अपनी हवेली में एक ऐसा कमरा बनवा रखा है, जिसमें उन्होंने अपने नवाबों के वक्त में इस्तेमाल किए गए बेहद दुर्लभ सामानों को सहेज के रखा हुआ है। इन सामानों को देखने के लिए न सिर्फ हिंदुस्तान की सरजमीं से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इनके सामानों पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बन चुकी है। नवाब कहते है कि मून वॉक फिल्म की शूटिंग के समय दाढ़ी रख ली, तब से ये मेरा पैशन बन गया, अब थियेटर और फिल्म निर्माता हमें इस लुक में पसंद करते हैं।
दुर्लभ सामान सहेजने के शौकीन
मौजूद नवाब मसूद के पिता दुर्लभ सामान सहेजने के शौकीन थे। देश-विदेश के लोग उन्हें देखने आया करते थे और नवाब बेहद चाव से उन्हें अपने सामान दिखाते और उनके बारे में रोचक जानकारियां देते। वह कई बार बताते थे कि बेशकीमती और ऐतिहासिक सामान एकत्रित करने और उनके व्यापार का शौक उन्हें पिता से विरासत में मिला था। नवाब के पास नवाबों के वक्त के दुर्लभ सामान होने की वजह से गदर, मिर्जापुर 2, खुदा हाफिज, इश्कजादे सहित कई बॉलीवुड फिल्मों में उनके सामानों का इस्तेमाल किया जा चुका है। उनकी हवेली में शूटिंग होना आम बात है। इंग्लैंड, फ्रांस, ईरानी, फ्रेंच, जर्मन, चाइनीज का दुर्लभ सामान मौजूद है। वहीं नवाबों का पीतल, चांदी और तांबे का बना हुआ पान दान, हुक्का, घर के सभी तरह के बर्तनों में खत्तारी आर्ट, हॉलैंड की प्लेटें, आयत लिखी हुई अलग प्रकार की मिट्टी की प्लेटों के अलावा पुराने जमाने का टेलीफोन, घड़ी, ग्रामोफोन, 80 साल पुराना रेडियो और नवाबों के वक्त के कई दुर्लभ सामान मौजूद हैं, जो आज भी आकर्षण का केंद्र है। एंटीक सामानों का यह खजाना आज के जमाने के लोगों को लखनऊ की तहजीब को खूब लुभाता है।
