प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लहराया तो झूम उठा गमछा कारोबार कई गुना बढ़ी बिक्री, यहां होता है सबसे ज्यादा व्यापार

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शैलेश अवस्थी/कानपुर l करोना काल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वायरस से सुरक्षा के लिए गमछा इस्तेमाल का सुझाव दिया था तो इस बार बिहार चुनाव जीतने के बाद इसे लहराकर विपक्ष को निशाने पर लेते हुए तंज कसा कि गर्दा उड़ा दिया l

इसके बाद गमछा ट्रेंड कर रहा और बिक्री भी बढ़ गई l यूँ तो गमछा भारतीय संस्कृति की पहचान शुरू से ही रहा है, लेकिन पिछले तीन दशक से राजनीतिक दलों की भी पहचान बनता जा रहा है और उन्हीं के मुताबिक इनकी ज़िजाइन तैयार हो रही है l अब तो डिज़ाइनर गमछे फैशन में हैं l

प्रधानमंत्री मोदी ही नहीं, हर दल के ज्यादातर नेता और कार्यकर्त्ता गले में गमछे, पट्टे या स्टोल डाले नज़र आते हैं l मोदी ने करोना काल में मुंह, नाक और कान ढककर इसकी उपयोगिता समझाई थी l बिहार चुनाव जीत के बाद नरेंद्र मोदी ने गमछा क्या लहराया कि उनकी तमिलनाडु की रैली और उनके स्वागत में हर जगह गमछा लहराये जाने लगे l असम में तो गमछा वहां की संस्कृति, सम्मान और पहचान का प्रतीक है और इसे जी-l टैग मिला है l

ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और बिहार में गमछे का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और वहीं से कानपुर के थोक कपड़ा बाज़ार में आता है l अब तो सालाना कोई 20 करोड़ का कारोबार है l इसी तरह डिज़ाइनर पटके और नकली सफ़ेद-क्रीम मोतीमाला भी खूब बिक रही है l कपड़ा कारोबारी शेष नारायण त्रिवेदी ने बताया कि स्वागत, सम्मान और अभिनंदन में अब डिज़ाइनर अंगोछे, स्टोल और पटके का चलन चरम पर है l बिक्री दोगुनी हो गई है l फूल मलाओं की बिक्री घटने से माली दुखी हैं l

एक नज़र गमछे के जलवे पर..

गया (बिहार) के पटवाटोली में गमछे के 10 हज़ार से ज्यादा छोटे-बड़े कारखाने हैं l पावरलूम और हाथकरघा के जरिये गमछे बनाए जाते हैं l सालाना सौ करोड़ का कारोबार होता है l पटवाटोली और तमिलनाडु के अलावा हापुड़ और बाराबंकी से सबसे ज्यादा माल आता है यहां l यूँ तो भगवा और केसरिया की मांग ज्यादा है, लेकिन नीला, हरा, गुलाबी, नारंगी, छीटदार और चमकदार भी खूब बिकता हैl

30 से डेढ़ सौ तक में लीजिए..

गमछा सूती, हैण्डलूम, खादी, रेशमी और टेरिकाट का मिलता है l 30 से डेढ़ सौ तक में खरीद सकते हैं l इसी तरह पटका 20 से 50, स्टोल 75 से 200 और दुपट्टा 50 से ढाई सौ तक में मिल जायेगा l

जानिए गमछा का मतलब...

गमुचा बंगाली शब्द है l ग मतलब शरीर और मुचा मायने पोछने वाला, यही शब्द हिंदी भाषी क्षेत्रों में गमछा कहलाया l बताते हैं कि वैदिक काल में भी गमछा था, जिसकी पोटली में रक्खे सुदामा के चावल कृष्ण भगवान ने खाए थे l 

फिल्मों में गमछा...

मनोज कुमार की फ़िल्म उपकार, पहचान, दिलीप कुमार की गंगा-जमुना, अमिताभ बच्चन की डॉन और सचिन की नदिया के पार सहित कई अन्य फिल्मों में गमछा खूब इस्तेमाल हुआ l सिर में बांधो तो मुरैठा, गले में डालो तो हार और बिछा लो बिछौना, कमर में बांध लो तो वस्त्र और पसीना भी पोछ लो l

बिक्री बढ़ी, बड़ा कारोबार 

कपड़ा कमेटी के संयोजक एवं निदेशक सुमित सागरी ने बताया कि अब केवल लाल-सफ़ेद नहीं, कई रंगों और डिज़ाइनों में गमछे उपलब्ध हैं l यह सही कि बड़े नेताओं और राजनीतिक दलों ने ज़ब से इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया है, बिक्री बहुत बढ़ गई है l 30 साल में चलन बहुत बढ़ा है, मोदी और अमित शाह ने इसे क्या धारण किया, यह फैशन में आ गया l

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