SIR में बांग्लादेशी-रोहिंग्या पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी, अवैध झुग्गी-झोपड़ी वालों को कहां से मिला आधार और राशन कार्ड होगी जांच

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Published By Muskan Dixit
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अधिकारियों की टीमें बनानी शुरू, डिटेंशन सेंटर की तैयारी में डीएम

लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश सरकार ने एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जिलाधिकारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय से डिटेंशन सेंटर बनाने के स्पष्ट निर्देश के बाद शहर-शहर अवैध झुग्गी-झोपड़ियों की पड़ताल के लिए अधिकारियों की टीमें बनानी शुरू कर दी है। ये जांच करेंगे कि 2003 की मतदाता सूची में सरकारी जमीन पर बसने वाले इन लोगों के नाम थे या नहीं, बाद में जोड़े गए तो आधार क्या था। खासकर किस दस्तावेज से आधार कार्ड, राशन कार्ड, बिजली कनेक्शन, वोटर कार्ड आदि बनता गया और इसके लिए शुरुआती दोषी कौन है।

पहले भी जांच एजेंसियों ने कई जिलों में ऐसे खानाबदोश और भ्रमणशील समुदाय चिन्हित किए हैं, जो वर्षों से झुग्गी–झोपड़ी, टीन-तिरपाल और मिट्टी की बस्तियों में रह रहे हैं। न उनका वहां कोई पुश्तैनी जमीन थी, न ही परिवार। आश्चर्यजनक रूप से इन परिवारों के पास न तो वैध नागरिकता प्रमाण हैं और न ही स्थायी पते का कोई रिकॉर्ड, लेकिन फिर भी इनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर लिस्ट में नाम दर्ज मिले हैं।

सूत्र बताते हैं कि पहचान पत्र जारी करने की स्थानीय प्रक्रियाओं में अनियमितताओं का लाभ उठाकर कई विदेशी नागरिक सामान्य भारतीय के रूप में दर्ज हो गए। एसआईआर प्रक्रिया में अब शासन का विशेष निर्देश है कि हर संदिग्ध परिवार से वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट में दर्ज अपने घर नंबर, पता और मतदान क्षेत्र की जानकारी देनी होगी। यदि कोई व्यक्ति या परिवार यह साबित नहीं कर पाता कि उसका नाम या उसके माता-पिता का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में दर्ज था, तो उसे संदिग्ध नागरिकता सूची में रखा जाएगा।

अस्थायी झुग्गी-झोपड़ी से शुरू हुआ खेल

अस्थाई झुग्गी–झोपड़ी, तिरपाल और अस्थायी बस्तियों में रहने वाले बांग्लादेशी और रोहिंग्या परिवारों को पहले स्थानीय स्तर पर रहने की अनुमति जैसी स्थिति दी गई। कुछ प्रभावशाली स्थानीय लोगों ने इन्हें मजदूरी, सफाई और छोटे कामों में लगवाया, जिससे इलाके में स्थायी उपस्थिति दिखने लगी। ज्यादातर मामलों में आधार कार्ड स्थानीय लोगों द्वारा दिए गए गलत पते पर बनाया गया। कई जगहों पर आधार एनरोलमेंट कैंपों का दुरुपयोग हुआ, जहां बगैर किसी सख्त दस्तावेज के कहीं पार्षद तो कहीं सभासद या ग्रामीण इलाकों में प्रधान से फोटो के साथ प्रमाण पत्र बनवाकर आधार जारी कर दिए गए। आधार मिलने के बाद पहचान साबित करना और आसान हो गया।

राशन कार्ड से सरकारी लाभों से जुड़ाव

आधार कार्ड के जरिये पर राशन कार्ड बनवाया गया, जिसमें पूरा परिवार शामिल कर दिया गया। राशन कार्ड से इन परिवारों को सरकारी योजनाओं और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) में जगह मिल गई। प्रशासनिक रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो जाने से स्थायी निवासी होने का भ्रम और मजबूत हुआ। कई जिलों में अवैध बस्तियों में घरेलू बिजली कनेक्शन जारी हुए। बिजली बिल में दर्ज ग्राहक संख्या और पता अक्सर वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने का आधार बना। बिजली से जुड़े रिकॉर्ड ने इन्हें पिछले कई साल से रहने वाले परिवार दिखाकर चुनावी लाभ कराया। स्थानीय स्तर पर दबाव और सिफारिशों से इन्हें सामान्य नागरिक बताकर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ गए। कई जगहों पर बूथ लेवल ऑफिसर की जांच औपचारिक रही, जिससे फर्जी पते पर भी वोटर आईडी बन गए।

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