धर्म ध्वजा लहराई... त्रेतायुग का अहसास करा रही अयोध्या, तस्वीरों में देखिये क्या है खासियत 

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Published By Anjali Singh
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अमृत विचार। विवाह पंचमी के अवसर पर आज प्रभु श्री राम जन्मभूमि चमक दमक रही है। आपको बता दें कि मार्गशीर्ष के महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन मनाई जाती है। इस बार विवाह पंचमी आज के दिन यानि 25 नवम्बर मंगलवार को है। मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में इसी दिन भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह हुआ था। 

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इस उत्सव को खासतौर से नेपाल और मिथिलांचल में भी मनाया जाता है। विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर भगवान श्रीराम और जनकनंदिनी माता सीता की उपासना करनी चाहिए। बालकाण्ड में राम-सीता के विवाह प्रसंग का पाठ करने से पारिवारिक जीवन में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली आती है। 

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विवाह पंचमी के अवसर पर अयोध्या में इस बार बेहद खास और आध्यात्मिक क्षण है

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इस बार विवाह पंचम पर अयोध्या जी में रामलला मंदिर के शिखर पर अभिजीत मुहूर्त में धर्म ध्वजारोहण का विशाल कार्यक्रम किया गया है, जो मंदिर की भव्यता और दिव्यता दर्शा रहा है ।

क्या है राम जन्मभूमि के खास आकर्षण, देखें  

विशेष रूप से तैयार किया गया यह ध्वज 22 फुट लंबा और 11 फुट चौड़ा है, जिसे इस ऐतिहासिक अवसर को चिह्नित करने के लिए मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा। ध्वज का निर्माण अहमदाबाद के एक पैराशूट विशेषज्ञ ने किया है। दो से तीन किलोग्राम वजनी यह ध्वज 161 फुट ऊँचे मंदिर शिखर और 42 फुट ऊँचे ध्वजदंड पर लगने वाली हवाओं और मौसमीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।

श्रीराम मंदिर पर ध्वजारोहण से पहले धर्म ध्वजा की पहली तस्वीर 

ध्वज पर अंकित तेजस्वी सूर्य भगवान राम के तेज, पराक्रम और दिव्य प्रभाव का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त 'ॐ' चिन्ह और वृक्ष की आकृति भी इस ध्वज पर उकेरी गई है, जो आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक निरंतरता का संदेश देती है। 

धर्म ध्वजा शुद्ध केसरिया रंग की है जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात सामान्यतः 3:2 या 2:1 आयताकार है। ऊपरी हिस्से में दो भागों में कटा हुआ (द्वि-शिखर या त्रिकोणीय कटाव) होता है, जिसे "केंशुआ" या "दो पूँछ" कहते हैं। इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति है जो कि ॐ के साथ या बिना ॐ के रूप में अंकित है। इसमें  रेशम, सूती या सिंथेटिक का इस्तेमाल किया गया है। 

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जिसे पूजा अर्चना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यह सनातन धर्म की विजय-पताका मानी जाती है, जिसे "जय पताका" भी कहते हैं। ॐ/स्वास्तिक चिह्न ही धर्म ध्वजा की पहचान हैं। यही वह पताका है जिसे ऋग्वेद में "जय पताका", रामायण-महाभारत में विजय-ध्वज और इतिहास में हजारों वर्षों तक भारतीय सनातन शक्ति का प्रतीक माना गया है।

‘एक नए युग की शुरुआत’ CM योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण को “एक नए युग की शुरुआत” बताया।

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उन्होंने इस कार्यक्रम में मौजूद रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत तथा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का धन्यवाद किया।

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आगंतुकों को संबोधित करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान राम का भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की “आस्था, सम्मान और आत्म-गौरव” का प्रतीक है। उन्होंने इसके निर्माण में योगदान देने वाले सभी “कर्मयोगियों” का दिल से आभार व्यक्त किया।

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उन्होंने कहा कि यह दिन ‘‘उन संतों, योद्धाओं और राम भक्तों की “अटूट भक्ति” को समर्पित है जिन्होंने इस आंदोलन और लंबे संघर्ष के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, जिसका नतीजा मंदिर के निर्माण के रूप में सामने आया।’’ 

ध्वजारोहण पर मोहन भागवत 

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अयोध्या मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सम्बोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी के लिए एक अच्छा दिन है, बहुत से लोगों ने इसका सपना देखा। इसके लिए अपनी जान दी, आज उनकी आत्मा को शांति मिली। 

विवाह पंचमी का शुभ मुहूर्त 

ज्योतिषाचार्य एसएस. नागपाल बताते हैं कि इस तिथि में घरों और मंदिरों में उत्सव होते हैं। राम व सीता का पारंपरिक रूप से गठबंधन किया जाता है।

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अगर विवाह में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न हो रही है, तो इस दिन व्रत रखें। मनचाहे विवाह का वरदान प्राप्त होता है।  

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पंचमी तिथि आरंभ: 25 नवंबर

सर्वार्थ सिद्धि योग: शिववास योग: शुभ योग रहेगा

पूजा शुभ मुहूर्त : प्रात:काल से दोपहर तक पंचमी का शुभ समय श्रेष्ठ है

अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 52 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक सर्वश्रेठ समय है।

पांचवीं बार अयोध्या आने वाले मोदी पहले प्रधानमंत्री

अयोध्या विवाद शुरू होने के बाद अब तक अयोध्या ने कई इतिहास रचे है। कभी आंदोलन को लेकर तो कभी सृजन को लेकर। एक बार फिर अयोध्या इतिहास रचने के मुहाने पर है।

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इस बार अयोध्या से नए युग की शुरूआत होने वाली है। इस बार अयोध्या के साथ प्रधानमंत्री मोदी भी नया इतिहास बनाने वाले हैं। वह देश के पहले प्रघधानमंत्री हैं तो सवा पांच साल में पांच बार अयोध्या पहुंचे। 

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पहले बार वह 20 अगस्त 2020 को श्री राम मंदिर के लिए भूमि पूजन करने पहुंचे थे।

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दूसरी बार 30 दिंसंबर 2023 को अयोध्या एयरपोर्ट सहित अन्य परियोजनाओं का लोकार्पण करने पहुंचे थे। 

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तीसरी बार वह 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने पहुंचे 

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फिर लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई 2024 को रोड करने के साथ राम लला का दर्शन करने पहुंचे थे।

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10 हजार झंडों से भगवामय हुई रामनगरी 

राममंदिर पर ध्वजारोहण के अवसर पर पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने भी 10 हजार भगवा झंडे तैयार करवाये हैं।

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यह भगवा ध्वज अयोध्या/फैजाबाद के सभी वार्डों सहित रामपथ, धर्मपथ आदि पर सजाए-फहराए जा रहे हैं।

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पूर्व सांसद की योजना सोमवार रात में ही रामनगरी को भगवामय कर देने के लिए बड़ी संख्या में लोग लगा दिए गए थे।

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