Moradabad: कान में गूंज रही सीटी...शहर में देर रात तक तेज आवाज में बज रहे डीजे
मुरादाबाद, अमृत विचार। सहालग के सीजन में डीजे का तेज आवाज वृद्ध और हृदय रोगियों को भारी पड़ रहा है। कानफोडू आवाज उन्हें अस्पताल पहुंचा रही है। बावजूद इसके जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। केवल कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि रात 10 बजे के बाद डीजे न बजाए जाएं, लेकिन देर रात तक सड़कों पर इनकी तेज आवाज और धमक जारी है। शादी विवाह के दौरान इनके आसपास से गुजरने वाले राहगीर परेशान हो रहे हैं। बरात में भीड़भाड़ के कारण वे तेजी से निकल भी नहीं पाते। डीजे के आतंक से कान में सीटी बजने की समस्या वाले लोगों की संख्या बढ़ने लगी है।
जिला अस्पताल के ईएनटी विभाग की ओपीडी में डॉ. समृद्धि सेठिया ने बताया कि इस समस्या को लेकर बीते कुछ दिनों से हर रोज चार-पांच लोग आ रहे हैं। तेज आवाज के साथ डीजे वाले रंग-बिरंगी चमक के साथ लेजर लाइट भी चमका रहे हैं। इससे आंखों को नुकसान हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि लेजर लाइट की किरणें आंखों की पुतली पर एक छोटे और तीव्र बिंदु पर केंद्रित होती हैं, इससे जलन या रोशनी कम होने की समस्या हो सकती है।
महानगर में हैं 200 से अधिक डीजे
महानगर में 200 से अधिक डीजे संचालित हैं, इनमें कुछ के पास दुकानें हैं, बाकी अपने घरों से ही कारोबार कर रहे हैं। डीजे की बुकिंग सेटअप के मुताबिक होती है। बड़े सेटअप में गमले, लेजर लाइटें, बग्घी और फ्लोर आदि मांगा जाता है, जबकि छोटे में केवल डीजे ही रहता है। डीजे संचालक एक कार्यक्रम के 20 से लेकर 50 हजार रुपये तक वसूलते हैं।
बुजुर्ग व हृदय रोगियों के लिए घातक है तेज आवाज
तेज आवाज में डीजे बजने से न सिर्फ बुजुर्ग व मानसिक रोगी परेशान होते हैं बल्कि हृदय रोगियों के लिए यह जानलेवा हो सकता है। जिला अस्पताल के जनरल फिजिशियन डॉ. मनोज यादव ने बताया कि डीजे की तेज आवाज के दौरान बेस की धुन परेशान करने वाली होती है। इससे मनोरोगियों को नींद नहीं आती, जिससे उनकी बेचैनी, परेशानी, तनाव आदि बढ़ जाता है। बुजुर्ग और हृदय रोगियों में हार्मोन तेजी से बदलने से दिल की गति (घड़कन) अनियंत्रित हो जाती है। जब नींद नहीं आती है तो घबराहट, बेचैनी आदि की दिक्कत होने लगती हैं। ट्रोपोनिन हार्मोन की वजह से हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
