हाईकोर्ट : हर विवाद में डीएनए परीक्षण उचित नहीं

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज, अमृत विचार : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पितृत्व संदेह से उत्पन्न एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि बच्चे के पितृत्व पर विवाद उत्पन्न होने मात्र से डीएनए परीक्षण का आदेश देना न्यायालयों की सामान्य प्रक्रिया नहीं हो सकती। ऐसे आदेश केवल अपवाद स्वरूप परिस्थितियों में ही पारित किए जा सकते हैं, जब इस बात के ठोस प्रमाण हों कि कथित प्रासंगिक अवधि में पति-पत्नी के बीच सहवास अथवा एक-दूसरे तक पहुंच की कोई संभावना ही नहीं थी। 

उक्त आदेश न्यायमूर्ति चव्हाण प्रकाश की एकलपीठ ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज मामले में रामराज पटेल द्वारा दाखिल पुनरीक्षण याचिका को  खारिज करते हुए पारित किया। कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा कि मात्र पितृत्व पर सवाल खड़े कर देना डीएनए जांच के लिए बाध्यकारी आधार नहीं है। मामले के अनुसार याची ने दावा किया कि उसकी शादी अप्रैल 2008 में हुई। पत्नी उसके साथ केवल एक सप्ताह ही रही और दिसंबर 2012 में जन्मी बच्ची उसकी जैविक संतान नहीं है, क्योंकि पत्नी वर्ष 2011 से मायके में रह रही थी। इसी आधार पर उसने बच्ची का डीएनए परीक्षण कराने का आग्रह किया था। ट्रायल कोर्ट और बाद में वाराणसी के अपर सत्र न्यायाधीश ने यह आवेदन अस्वीकार कर दिया, जिसके विरुद्ध पति ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण दाखिल किया।

कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 का हवाला देते हुए कहा कि विवाह के दौरान जन्मे बच्चे की वैधता के पक्ष में “निर्णायक विधिक अनुमान” लागू होता है यानी जब तक यह साबित न कर दिया जाए कि बच्चे के जन्म के समय दंपत्ति के बीच सहवास की संभावना शून्य थी, तब तक पति को पिता ही माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी माना कि “गैर-पहुंच” का अर्थ केवल सहवास न होना नहीं, बल्कि पक्षकारों के एक साथ रहने अथवा शारीरिक पहुँच के अवसर का पूर्ण अभाव होना चाहिए। अंत में कोर्ट ने पाया कि याची ने केवल पितृत्व न होने का दावा दोहराया, परंतु यह सिद्ध नहीं कर सका कि बच्ची के जन्म काल में पत्नी तक उसकी पहुँच असंभव थी। अतः कोर्ट ने विशेष मजिस्ट्रेट और अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा डीएनए परीक्षण से इनकार को सही ठहराते हुए  कहा कि निचली अदालतों के निष्कर्ष विधिसंगत हैं और आदेशों में कोई अवैधता नहीं है। मामले में संशोधन की कोई योग्यता न पाते हुए याचिका खारिज कर दी गई।

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