लखनऊ : उद्योगों के लिए जमीन हुई और सस्ती, लीज रेंट घटाने की तैयारी

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

राज्य ब्यूरो, लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भूखण्ड उपलब्ध कराने के अलग-अलग नियमों और शर्तों को समाप्त करते हुए एक समान नीति बनाई जाएगी। ऐसे में उद्योग लगाने की प्रक्रिया सरल, सुगम और पारदर्शी होगी। भविष्य में भूखण्ड आवंटन नीलामी से न होकर लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिससे छोटे उद्यमियों और स्टार्टअप इकाइयों को भी समान अवसर मिल सके।

औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी की अध्यक्षता में बुधवार को 6 कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर लघु उद्योग भारती प्रतिनिधिमंडल और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक व्यापक समीक्षा बैठक में उक्त बिन्दुओं पर मंथन किया गया। भूखण्ड के हस्तांतरण की व्यवस्था समाप्त करने पर जोर देते हुए मंत्रियों ने कहा कि आवंटित भूमि केवल उद्योग स्थापना के लिए प्रयुक्त होनी चाहिए और यदि कोई उद्यमी नियमों का पालन नहीं करता, भूमि का दुरुपयोग करता या हस्तांतरण करता है तो भूखण्ड स्वतः निरस्त किया जा सकेगा।

बैठक में यह भी प्रस्तावित किया गया कि एक ही प्रकार के उत्पादों के लिए एक ही औद्योगिक क्षेत्र में भूखण्ड आवंटन कर उद्योग क्लस्टर तैयार किए जाएं, जिससे उत्पादन इकाइयों को बेहतर सुविधा, लागत में कमी और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का लाभ मिल सके। सूक्ष्म उद्यमियों को सस्ती किश्तों पर शेड उपलब्ध कराकर प्लग एंड प्ले सुविधा विकसित करने पर भी सहमति बनी, ताकि नए उद्यमी बिना अतिरिक्त लागत के तुरंत उत्पादन प्रारंभ कर सकें।

मंत्रियों ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विकास अनिवार्य है, जिसके लिए सामुदायिक केंद्र, फायर स्टेशन, विद्युत उपकेंद्र, डिस्पेंसरी, कैंटीन और पुलिस चौकी जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। भूमि मूल्य और लीज रेंट पर चर्चा के दौरान यह सहमति बनी कि उद्योगों के लिए आवंटित भूमि पर लीज रेंट न्यूनतम होना चाहिए और यदि भूखण्ड सरकारी भूमि पर हो तो उद्यमियों से केवल विकास व्यय ही लिया जाए। वहीं निजी भूमि के आवंटन में कुल लागत और विकास व्यय पर कम से कम 25 प्रतिशत की छूट प्रदान करने का सुझाव दिया गया।

औद्योगिक क्षेत्र के टैक्स और मेंटेनेंस शुल्क में नगर निगम और औद्योगिक प्राधिकरण के बीच एकरूपता लाने और वसूली गई धनराशि का उपयोग केवल औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में किए जाने का निर्देश दिया गया। उद्यमियों के कामगारों के आवास के लिए भूमि के दायरे को भी बढ़ाने पर सहमति बनी।

संबंधित समाचार