1978 संभल दंगा : तराजू से बांधकर कुएं में फेंक दी थी व्यापारी की लाश...47 साल बाद खुदाई कर सबूतों की तलाश
संभल, अमृत विचार। संभल में सन 1978 में हुए साम्प्रदायिक दंगे से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कार्रवाई बुधवार को शुरू की गई। प्रशासन ने उस कुएं की खोदाई का काम शुरू कराया जिसमें दंगाइयों ने हत्या के बाद किराना व्यापारी रामसरन रस्तोगी का शव फेंका था।
संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की घटना के बाद प्रशासन ने पाट दिए गये कुओं को खोजकर उनकी खोदाई कराने का काम शुरू किया तो संभल से पलायन कर दिल्ली में बसे रामसरन रस्तोगी के पौत्र कपिल रस्तोगी ने 10 फरवरी 2025 को संभल आकर एसडीएम और डीएम को प्रार्थना पत्र देकर 1978 के दंगे में दादा की हत्या कर शव तराजू में बांधकर कुएं में डाल दिये जाने की घटना की जानकारी देकर कुएं को खुदवाने की मांग रखी थी।
24 नवंबर 2025 को डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण बिश्नोई शहर के पैदल मार्च कर रहे थे तभी बाजार गंज में सुशील रस्तोगी ने अधिकारियों को बताया कि 1978 दंगे में उनके ताऊ रामसरन रस्तोगी की हत्या के बाद शव उनकी दुकान के सामने कुएं में डाल दिया गया था। डीएम-एसपी ने सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार और पालिका ईओ डॉ. मणि भूषण तिवारी को कुएं की खुदाई कराने के निर्देश दिए थे।
बुधवार को एकता पुलिस चौकी महमूद खां सराय स्थित मुख्य बाजार में कुएं की खुदाई का काम शुरू कराया गया। सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार व पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणि भूषण तिवारी की मौजूदगी में मजदूरों ने पाट कर बंद कर दिये गये कुएं की खोदाई शुरू कराई। टीले जैसी जगह पर खोदाई का काम शुरू हुआ तो तमाम व्यापारी खोदाई की वजह जानने के लिए वहां पहुंचने शुरू हो गये।
आधे घंटे में ही नजर आ गया कुएं का वजूद
मजदूरों ने काम शुरु किया तो आधे घंटे में ही कुएं की दीवार नजर आ गई। सिटी मजिस्ट्रेट ने दीवार को देखा फिर उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई कि कुएं का वजूद नजर आ गया है।
