Bareilly: प्रदेश में 3683 करोड़ का मनरेगा का भुगतान अटका, बरेली का 150 करोड़ बकाया

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

महिपाल गंगवार, बरेली। प्रदेश में मनरेगा योजना के तहत कराए गए निर्माण कार्यों का दो साल का 3683 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। प्रधानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में योजना का नाम बदलकर वीबी-जी राम जी कर दिया है। मगर, नए नाम और नए दावों के बीच पुरानी भुगतान व्यवस्था की खामियां जस की तस बनी हैं। हालात यह है कि अकेले बरेली मंडल में ही करीब 150 करोड़ रुपये का बकाया फंसा हुआ है। शासन से समय पर ग्रांट न आने के कारण न तो पुराने भुगतान हो पा रहे हैं और न ही नए कार्यों को आगे बढ़ाया जा पा रहा है।

मनरेगा के तहत संपर्क मार्ग, इंटर लॉकिंग, पंचायत भवन, एमडीएम शेड, आंगनबाड़ी केंद्रों, अन्नपूर्णा भवनों, पार्क का निर्माण कराया जाता है। इसमें मजदूरी का सौ फीसदी भुगतान केंद्र सरकार करती है, जबकि सामग्री में 75 फीसदी हिस्सा केंद्र का और 25 फीसदी हिस्सा राज्य का है। बीते दिनों प्रदेश में कुल बकाया का 14 फीसदी भुगतान हुआ था। इसके बाद भी भुगतान की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 का 1068 करोड़, वित्तीय वर्ष 2024-25 का 2615 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। शासन से समय पर ग्रांट न मिलने की वजह से जिन कार्यों को पूरा किया जा चुका है, उनका भुगतान न मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी उन व्यापारियों को हो रही है, जिन्होंने सामग्री सप्लाई कर निर्माण कार्य पूरे कराए। अब पैसा न मिलने पर चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई छोटे व्यापारी आर्थिक तंगी के कगार पर पहुंच गए हैं।

उधर, ग्राम प्रधानों में भी इसको लेकर भारी नाराजगी है। प्रधानों का कहना है कि मनरेगा जैसी योजना, जो ग्रामीण रोजगार और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए बनी थी, आज खुद सिस्टम की भेंट चढ़ती दिख रही है। भुगतान न होने से उनकी साख गांव में गिर रही है। भविष्य में कोई भी व्यापारी उधार में काम कराने को तैयार नहीं है। अधिकारियों की ओर से सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। यदि शासन ने जल्द ग्रांट जारी कर बकाया भुगतान नहीं किया, तो इसका असर केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण बेरोजगारी और असंतोष भी तेजी से बढ़ेगा।

यह है बरेली मंडल का हाल
बरेली जिले में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के 11.56 करोड़, वित्तीय वर्ष 2024-25 के 28.67 करोड़ रुपये, पीलीभीत में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के 13.74 करोड़, वित्तीय वर्ष 2024-25 के 25 करोड़ रुपये, बदायूं में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के 6.52 करोड़, वित्तीय वर्ष 2024-25 के 23.01 करोड़ रुपये, शाहजहांपुर में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के 14.16 करोड़, वित्तीय वर्ष 2024-25 के 27.62 करोड़ रुपये का बकाया है।

मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी का भी 92 करोड़ बकाया
प्रदेश में मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी पर भी संकट छाया हुआ है। वर्ष 2022-23 से अब तक का 92 करोड़ रुपये बकाया है। ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाने वाली इस योजना में मजदूरों को समय पर मेहनताना न मिलना गंभीर चिंता का विषय है। महीनों से भुगतान अटका होने के कारण लाखों श्रमिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। दिहाड़ी पर निर्भर परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।

यही हाल रहा तो आसान नहीं होगी राह
अखिल भारतीय प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष सुधीश पांडेय का कहना है कि मनरेगा भुगतान को लेकर संगठन की तरफ से लगातार आवाज उठाई जा रही है। भुगतान में देरी से श्रमिक ही नहीं निर्माण सामग्री सप्लाई करने वाली फर्में भी परेशान हैं। भुगतान में इसी तरह से देरी होती रही तो योजना में काम करने के लिए वेंडर नहीं मिलेंगे। हमारी मांगी है शासन को निर्माण सामग्री और मनरेगा श्रमिकों का भुगतान अविलंब किया जाए।

संबंधित समाचार