राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होंगे कर्मचारी, निजीकरण के 400 दिन पूरे होने पर काली पट्टी बांधकर किया विरोध

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण और प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-25 के विरोध में बिजली कर्मियों का आंदोलन तेज हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि आगामी 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल में प्रदेश के एक लाख से अधिक बिजली कर्मी भाग लेंगे। यह हड़ताल नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स के बुलावे पर की जा रही है, जिसमें देशभर के करीब 27 लाख बिजली कर्मी शामिल होंगे। नए साल के पहले दिन, निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर, प्रदेश भर में बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दिवस मनाया। सभी जनपदों और परियोजनाओं पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि कोर कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया है कि निजीकरण और कथित उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के खिलाफ आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार निजीकरण का फैसला वापस नहीं ले लेती। साथ ही 12 फरवरी की हड़ताल की तैयारी के तहत जनवरी माह में छह बिजली महापंचायतें आयोजित की जाएंगी। ये महापंचायतें वाराणसी, ओबरा अनपरा, आगरा, केस्को (कानपुर), मेरठ और लखनऊ में होंगी। इनमें बिजली कर्मियों के साथ किसान, आम उपभोक्ता और केंद्रीय ट्रेड यूनियनें भी शामिल होंगी। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि 25 नवंबर 2024 को पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय लेकर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने कार्य वातावरण को बिगाड़ दिया है। समिति का कहना है कि बिजली कर्मी संघर्ष के दौरान उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं और अब समय आ गया है कि निजीकरण का निर्णय निरस्त कर सभी दमनात्मक कार्रवाईयों को वापस लिए जाने की मांग की।

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