UP: 22 दुकान व मकानों में रह रहे 48 लोगों को नोटिस...15 दिन में दिखाने होंगे वैध दस्तावेज
संभल, अमृत विचार। जामा मस्जिद से सटे कब्रिस्तान की भूमि पर कब्जे के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। विवादित धार्मिक स्थल के निकट स्थित आठ बीघा कब्रिस्तान की पैमाइश के बाद 22 दुकान-मकानों में रह रहे 48 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नगर पालिका परिषद में टैक्स जमा करने मात्र से भूमि पर स्वामित्व सिद्ध नहीं होता, इसके लिए वैध साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। ऐसा नहीं कर पाये तो सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
12 दिसंबर को श्री कल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष त्यागी एडवोकेट ने जामा मस्जिद से सटे कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया से शिकायत की थी। कहा था कि विवादित धार्मिक स्थल के निकट गाटा संख्या 32/2 में आठ बीघा भूमि राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है लेकिन लोगों ने इस जमीन पर कब्जा कर मकान व दुकानें बनाकर खड़ी कर लीं। कहा गया था कि यह कब्जे सपा के शासनकाल में किये गये।
यह भी आरोप था कि 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के दौरान इन्हीं मकानों की छतों से पुलिस बल पर पथराव व फायरिंग की गई थी। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम रामानुज व तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह को जमीन की पैमाइश कराने के निर्देश दिये थे। इसके बाद ही 30 दिसंबर को तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में नायब तहसीलदार बबलू कुमार, दीपक जुरैल और अरविंद कुमार सिंह की मौजूदगी में 22 लेखपालाें की टीम ने भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच कब्रिस्तान की भूमि की पैमाइश की थी। पैमाइश के दौरान ही साफ हो गया था कि 22 दुकानें और बहुमंजिले मकान कब्रिस्तान की भूमि पर बनाये गये हैं।
नहीं दिये पुख्ता दस्तावेज तो हटानेएं जाएंगे कब्जे
तहसीलदार संभल धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पैमाइश के दौरान यह बात साफ हो गई थी कि 22 दुकानें और उनके ऊपर जो मकान बने हैं वह कब्रिस्तान की भूमि पर बनाए गए हैं। पैमाइश के आधार पर गुरुवार को नोटिस जारी किए गए थे, जिन्हें शुक्रवार को सभी 48 लोगों को तामील करा दिया गया है। नोटिस में संबंधित लोगों को 15 दिन के भीतर अपना जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत करने का समय दिया गया है। यदि तय अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी। तहसीलदार ने कहा कि कई लोग यह दावा कर रहे हैं कि वह नगर पालिका को टैक्स दे रहे हैं, लेकिन टैक्स जमा करने से भूमि पर स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। एक ही इमारत में कई परिवार रह रहे हैं, इसलिए प्रत्येक परिवार को अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं।
उड़ी है रातों की नींद.
प्रभावित लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कीं लेकिन हाईकार्ट ने भी कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई और प्रशासन के सामने अपने दस्तावेज रखने के निर्देश के साथ याचिका निस्तारित कर दी। इसके बाद आरोपी लोगों की रातों की नींद उड़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि इन्हीं दुकानों से उनकी रोजी रोटी चलती है। साथ ही कई लोगों के मकान भी दुकानों के ऊपर ही बने हैं। ऐसे में प्रशासन ने आगे कदम बढ़ाकर कुछ किया तो वह सड़क पर आ जायेंगे।
