संपादकीय: दर्दनाक दुर्घटना के सबक
स्विट्ज़रलैंड जैसे अत्यंत विकसित, अनुशासित और सुरक्षित माने जाने वाले देश में नववर्ष की पूर्व संध्या पर क्रान्स मोंटाना के एक स्की रिसॉर्ट बार में विस्फोट और आग से लगभग 47 लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उत्सव, सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता के बीच संतुलन पर गंभीर प्रश्न है। प्रथम दृष्टया यह हादसा ‘उत्सव के अति उत्साह’ और लापरवाही का परिणाम प्रतीत होता है।
नववर्ष समारोहों में मोमबत्तियां, शैंपेन की बोतलों पर सजावट, फुलझड़ियां और कथित तौर पर ‘पायरोटेक्निक डिवाइस’ का उपयोग किया जा रहा था। यदि मोमबत्तियां लकड़ी की छत के पास रखी गईं या बेसमेंट में रखी आतिशबाजी से चिंगारी फैली, तो यह सीधी मानवीय चूक है। गैस लीक की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। विकसित देशों में भी जब नियमों को ‘एक रात की छूट’ दे दी जाती है, तो हादसे की ज़मीन तैयार हो जाती है।
यह तथ्य और भी चौंकाने वाला है कि मात्र 15 हजार आबादी वाले इस नगर के एक बार में करीब 150 लोग मौजूद थे और उनमें से एक-तिहाई की जान चली गई। इसे स्विट्ज़रलैंड के हालिया इतिहास की सबसे भीषण अग्नि दुर्घटनाओं में गिना जा रहा है। 150 से अधिक हेलीकॉप्टर, सैकड़ों बचावकर्मियों और बड़े पैमाने पर आपात संसाधनों की तैनाती इस बात की पुष्टि करती है कि हादसा कितना व्यापक और भयावह था।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि बाहर निकलने के रास्ते और सीढ़ियां अत्यंत संकरी थीं। 30 सेकंड के भीतर लगभग 200 लोग बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, जिससे भगदड़ मच गई और लोग दबने व दम घुटने से मारे गए। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या रिसॉर्ट की डिजाइन और फायर-सेफ्टी ऑडिट में गंभीर खामियां थीं? क्या आपदा प्रबंधन, प्रशिक्षित स्टॉफ, स्पष्ट एग्ज़िट साइन और त्वरित मार्गदर्शन की व्यवस्था नहीं थी? यदि स्विट्ज़रलैंड जैसे देश में भी ऐसी चूक संभव है, तो यह चेतावनी है कि ‘विकास’ सुरक्षा की गारंटी नहीं होता।
भारत के संदर्भ में यह घटना और भी प्रासंगिक है। गोवा जैसे पर्यटन स्थलों पर हुए अग्निकांडों में भी संकरे रास्ते, अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के कारण लोगों की जान गई। फर्क केवल इतना है कि वहां हम अक्सर इसे ‘व्यवस्था की विफलता’ कहकर आगे बढ़ जाते हैं। क्रान्स मोंटाना की त्रासदी सिखाती है कि नियम चाहे यूरोप में हों या भारत में, उनका कठोर पालन ही जीवन बचाता है।
आने वाले समय में इस घटना का असर क्रान्स मोंटाना में प्रस्तावित एफआईएस वर्ल्ड कप जैसे अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों पर भी पड़ेगा। इससे उसे साख का नुकसान हो सकता है। ऐसे में सुरक्षा मानकों की पुनर्समीक्षा अनिवार्य होगी। इससे पहले 2000 और 2020 में स्विट्ज़रलैंड के अन्य शहरों में लगी आग से यदि पर्याप्त सबक लिया गया होता, तो शायद यह दिन न देखना पड़ता। निष्कर्षतः, भारत समेत सभी देशों को यह सीख लेनी चाहिए कि उत्सव, पर्यटन और व्यवसाय तभी सार्थक हैं जब सुरक्षा सर्वोपरि हो। आपदा प्रबंधन कोई औपचारिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि जीवित व्यवस्था होनी चाहिए— हर इमारत, हर आयोजन के लिए।
