ए भाई जरा देख के चलो... जयंती पर याद आए गीतों के राजकुमार नीरज
कानपुर, अमृत विचार : अपने प्रेमपगे गीतों से पूरी दुनिया में छा जाने वाले कवि गोपाल दास नीरज की जिंदगी का एक हिस्सा कानपुर में भी बीता था और उन खट्टी-मीठी यादों को उन्होंने अपनी कविता "कानपुर की पाती" में बखूबी संजोया है l
सौ साल पहले 4 जनवरी 1925 में इटावा के पुरावली गांव में जन्मे नीरज कवि सम्मलेनों की शान हुआ करते थे l उन पर प्रकाशित पुस्तकों में लिखा है कि उनके प्रेम गीत सुनकर लड़कियां मन्त्रमुग्ध हो जाती थीं l न जाने कितने प्रेमियों ने नीरज की लिखी प्रेमरस से सराबोर पंक्तियों के जरिये अपने प्रिय को प्रभावित किया और प्रेम प्रस्ताव भेजा l यह भी तथ्य है कि उनका "मृत्युगीत" सुनकर लड़कियां सुबकने लगती थीं और उन्हें आत्महत्या का ख्याल आने लगता था l इसी कारण उस गीत को बैन कर दिया गया था l
नीरज ने फिल्मों के लिए कोई डेढ़ सौ गीत लिखे और लगभग सभी हिट रहे l देवानंद, राजकपूर, मनोज कुमार और शशि कपूर के वह बेहद प्रिय रहे l नई उमर की नई फसल, शर्मीली, कन्यादान, पहचान, मेरा नाम जोकर, छुपा रुस्तम, चा चा चा और प्रेम पुजारी जैसी फिल्मों के सुपरहिट होने में नीरज के लिखे गानों की बड़ी भूमिका थी l उनके गैर फ़िल्मी गीत की लंबी श्रृंखला है l उनकी कविताओं में पीड़ा, दर्शन, सीख और प्यार है l समय-समय पर गीतों के जरिये राजनीति पर तीखी टिप्पणी भी की थी l वह अक्सर कानपुर कवि सम्मलेन में आते थे l
नीरज की रोमांटिक जिंदगी के बारे में अक्सर चर्चा होती है और कानपुर की चाँदकुमारी का नाम उनसे जोड़ा जाता है l लेकिन नीरज ने खुद बताया था कि वह चाँदकुमारी को मां मानते थे l हां, यह भी सच है कि एक गुजरती लेखिका कुंदन के प्यार में पागल थे और उसकी याद में कई गीत रचे थे l गोपाल दास नीरज के कानपुर प्रवास के दिन बेहद मुफलिसी में कटे l क्लर्क की नौकरी की, पेन बेचे और गंगा में गोते लगाकर सिक्के बिने l उन्हें पद्मश्री और पद्मविभूषण सहित कई बड़े पुरस्कार भी मिले l जुलाई 1918 में उनका निधन हो गया था l
ये फ़िल्मी गीत सुपरहिट रहे
लिखे जो खत तुझे..., ए भाई ज़रा देख के चलो..., दिल आज शायर है.., जीवन की बगिया महकेगी..., शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब..., बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं..,आया न हमको प्यार जताना प्यार कभी से तुम्हें करते हैं..., मेरा मन तेरा प्यासा..., रंगीला रे..., जैसे राधा ने माला जपी श्याम की..., खिलते हैं गुल यहां..., ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली आओ न..., फूलों के दिल से दिल की कलम से..., ए भाई ज़रा देख के चलो..., आज मदहोश हुआ जाए रे मेरा मन..., कारवां गुजर गया...एक मैंने कसम ली..सहित और भी कई गीत लिखे l
गैर फ़िल्मी गीत
इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में.., छुप छुप अश्रु बहाने वालों..., अबकी सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई.., सांसों का सफऱ अब खत्म होने वाला है..., याद किसी की मन में हो तो मगहर वृंदावन लगता है.., मौत मर जाती है पल भर के लिए ज़ब मैं हांथों में ज़ाम लेता हूं..., मज़हब इस देश में अब ऐसा चलाया जाए.., बतमीज़ी कर रहे हैं आज कुछ भौंरे चमन में..., रोज मिलती थीं कभी छुप छुप कर..., आंसू ज़ब सम्मानित होंगे, मेरा नाम लिया जाएगा...,आदि l गीतों के कई संग्रह प्रकाशित हुए l
