अयोध्या : कड़ाके की ठंड में जर्जर रैन बसेरों में कांपते भक्त, अलाव तक नहीं... खरपतवार जलाकर सेंक रहे हाथ
मसौधा, अयोध्या, अमृत विचार: देश के कोने-कोने से योगिराज भरत की तपस्थली भरतकुंड पहुंच रहे श्रद्धालु कड़ाके की ठंड में कांप रहे हैं। पर्याप्त अलाव व्यवस्था न होने से श्रद्धालु खरपतवार, घास-फूस व कागज जलाकर हाथ सेंक रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में बने भरतकुंड के रैन बसेरे में ठहरना श्रद्धालुओं के लिए जोखिम भरा हो गया है। सुदूर जिलों व प्रांतों से आने वाले श्रद्धालु जैसे तैसे भरतकुंड की परिक्रमा कर रहे हैं।
नगर पंचायत भरतकुंड भदरसा क्षेत्र के इस स्थल पर व्यवस्था के नाम पर भरतकूप, सत्ताइसा कुआं, भरत गुफा जैसे महत्वपूर्ण पौराणिक स्थलों को छोडि़ए, भरत जी की कुलदेवी मंदिर पर भी अलाव की व्यवस्था नहीं है। श्रद्धालु ऐन केन प्रकारणेन बिना रात बिताए दर्शन पूजन कर अगले गंतव्य स्थान के लिए रवाना हो रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध भरतकुंड ऐसा स्थान है जहां श्री राम के वनवास काल के दौरान भरत जी ने श्रीराम की खड़ाऊ के सहारे 14 साल तक तपस्या में बिताए थे। विक्रमादित्य के जमाने से भरत गुफा जैसे हर मंदिरों में पूजा पाठ 24 घंटे होता रहा है, लेकिन उपेक्षा के चलते सुविधाएं नाम मात्र मिल रही हैं। भाजपा सरकार में धार्मिक स्थलों का महत्व बढ़ा, लेकिन यहां सुविधाओं के नाम पर कागजी कार्रवाई भले ही चौचक हो, लेकिन मौके की हकीकत अलग है।
बोले महाराष्ट्र के श्रद्धालु
शनिवार लगभग साढ़े चार बजे बसों से महाराष्ट्र के नासिक से यहां पहुंचे शिवनाथ गायकवाड, प्रथमेश गायकवाड, आदित्य गायकवाड ,सरिता शारदा, योगिता गायकवाड, योगिताबाली ने कहा कि हमारे महाराष्ट्र में ऐसा क्लाइमेट नहीं है। वहां मौजूदा समय में भी ठंडक का एहसास नहीं है, लेकिन यहां आने के बाद ठंडक से हालत खराब हो गई। योगिता ने कहा कि यहां सत्ता शासन बेखौफ हैं। प्रशासन को चाहिए कि यहां अलाव की व्यवस्था कराए। श्रीराम भरत मिलाप मंदिर, हनुमान भरत मिलाप मंदिर के चारों ओर दुकानदारों ने दुकानें सजाई है। बसों का ठहराव भी यहीं होता है। यहां पहुंचते ही श्रद्धालु ठंड से कांपने लगते हैं। मंदिर के आसपास अलाव की व्यवस्था नहीं है। जो श्रद्धालुओं के साथ ना इंसाफी। इसके लिए जब नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी विनय कुमार द्विवेदी से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
