बिना काम किया भुगतान...बदल दिया आवास का लाभार्थी, DDO, PD टीम की जांच में खुली असलियत

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Published By Anjali Singh
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राजेंद्र कुमार पांडेय, अयोध्या, अमृत विचार। बिना काम कराए ही परियोजना पर पैसे का भुगतान कर दिया गया। प्रधानमंत्री आवास के लाभार्थी को बदल कर दूसरे को लाभ दे दिया गया। ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में खेल किया गया। जांच हुई तो असलियत खुलकर सामने आ गई। अब हलचल है। मामला तारुन ब्लॉक की ग्राम पंचायत गरौली का है। ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में अनियमितता को लेकर गांव के रहने वाले सुधीर कुमार तिवारी, सुनील कुमार मौर्य ने शिकायत की थी। 

इसकी जांच पहले खंड विकास अधिकारी के स्तर से कराई गई तो अनियमितता के मामले पकड़ में आए। इसके बाद जिलाधिकारी की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराई गई। जांच कमेटी में जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए के साथ एक सहायक अभियंता को नामित किया गया था। जांच टीम की रिपोर्ट जन सूचना के जरिए सामने आई।

रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। मनमानी काम कराए गए, वित्तीय नियमों को दरकिनार कर भुगतान कर दिया गया। गांव में राम लाल के घर से जय राम के घर तक नाली बगैर नाली निर्माण लगभग 45 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया। 

बाद में सफाई दी कि बाबू राम के घर से भोलू के घर तक नाली निर्माण का भुगतान किया गया। तत्कालीन प्रधान व सचिव दोषी पाए गए। हैंडपंप मरम्मत का काम चरागाह बन गया। एक ही आईडी पर साल 2021-22, 2022-23, 20223-24 में 63665 रुपये का भुगतान कर दिया गया। खास तो यह रहा कि जांच के दौरान वह हैंडपंप भी नहीं बता पाए, जिस पर मरम्मत का काम कराया गया। हैंडपंप की लोकेशन गांव के बाहर आ रही थी।

इससे बड़ा खेल तो आवास के आवंटन और लाभार्थी को लाभ पहुंचाने में किया गया। चयन श्याम लाल पुत्र देवराज की आईडी पर हुआ और बैंक में खाता फीड कराया श्याम लाल पुत्र सुखराज का। आवास का लाभ गलत लाभार्थी श्याम लाल पुत्र सुखराज को मिला। यही इतना नहीं बीपीएल सूची 2002 के क्रमांक 5763 पर अंकित राजकुमार अनुसूचित जाति के नाम पर नीलू पत्नी राजकुमार सामान्य जाति को आवास का लाभ दे दिया। 

ग्राम रोजगार सेवक सुरेश कुमार भी कमाल करने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने मस्टर रोल संख्या 4805 से 4807 तक एनएमएमएस के माध्यम से दर्ज की गई उपस्थिति में एक ही फोटो अपलोड कर डाली। हालांकि सफाई यह दी कि चूकवश ऐसा हुआ। भुगतान नहीं किया गया। हाजिरी शून्य कर दी गई। विद्यालय की नवनिर्मित बाउंड्री वाल में पांच स्थानों पर फटी मिली। जांच अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी और जेई ने की। मौरंग का प्रयोग नहीं मिला। बालू मिली। 

पहली और दूसरी जांच के बीच इसे दुरुस्त करा दिया गया। दूसरी जांच में दीवाल सही मिली। मोरंग का प्रयोग भी मिल गया। जांच कमेटी ने अलग-अलग कार्यों के लिए तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव राजकुमार, माता प्रसाद, जय सिंह यादव दोषी पाए गए। अब हलचल है। तारून की ग्राम पंचायत गरौली के विकास कार्यों की जांच में अनियमितता मिली है। दोषी पाए गए प्रधान व सभी कर्मचारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।-अविनाश कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी।

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