भारतीय प्रवासी दिवस और अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस पर विशेष: शहद से मीठी हिंदी, दुनिया में घोल रही मिठास
मार्कण्डेय पाण्डेय/ लखनऊ, अमृत विचार: हिंदी से मधुर कोई भाषा नहीं है, इसलिए हिंदी वैश्विक भाषा बनती जा रही है। इस भाषा को बोलने पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलता है। ये कहना है लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ रहे उन छात्र-छात्राओं को जिन्होंने न केवल हिंदी सीख ली है, बल्कि इसकी महत्ता को प्रचारित भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अपने देश लौटकर परिवार और अन्य लोगों को भी हिंदी सिखाएंगे। ये विद्यार्थी हिंदी के गाने भी खूब सुनते हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. रवीन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि एक आंकड़े के अनुसार आज विश्व के 176 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। ये इसके प्रचार प्रसार का जीवंत प्रमाण है। भाषा का विकास अर्थ व्यवस्था, राजनय व शासन प्रशासन से भी जुड़ा होता है। देश उभरती अर्थव्यवस्था और सुदृढ़ राजनयिक नीतियों ने इस प्रक्रिया को और तेज़ किया है।
जितना हिंदी सीखती हूं, उतना ही प्यार हो जाता है
श्रीलंका की अंजना मुतुमाली कहपलआरच्ची कहती है कि हिंदी समृद्ध भाषा है। संसार में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, सब से मधुर भाषा है तो सिर्फ हिंदी है। जितनी हिंदी मै सीखती हूं उतना ही हिंदी से प्यार होता जाता है। वह बताती है कि श्रीलंका के 88 विद्यालय में से 5 विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जाती हैं। हिंदी की मांग अब पूरी दुनिया में होने लगी है।

दिलों को जोड़ती है हिंदी
बांग्लादेश के अंतु कुमार विश्वास विश्वविद्यालय में जैव विविधता एवं वन्यजीव संरक्षण विषय में शोधार्थी हैं। हिंदी बोलते और समझते हुए मुझे अपनापन महसूस होता है। यह भाषा दिल से दिल को जोड़ती है और एक विदेशी होने के बावजूद मुझे अलग महसूस नहीं होने देती।
विदेशी संबंध मजबूत करेंगे
स्नातक की छात्रा ताजिकिस्तान की युल्बेकोवा उमेद ने बताया कि जब मैं पहली बार यहां आई, तो मुझे हिंदी भाषा के बारे में कुछ भी नहीं पता था, लेकिन धीरे-धीरे और निरंतर प्रयास से मैंने हिंदी सीखना शुरू किया। अब मैं हिंदी भाषा सम्मेलनों में भी सक्रिय रूप से भाग लेती हूं। एमए हिन्दी के दूसरे वर्ष की छात्रा ताजिकिस्तान की सइदोवा खनिफा ने कहा कि ताजिकिस्तान और भारत के बीच संबंध विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर मज़बूत होते जा रहे हैं। शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, व्यापार और चिकित्सा हर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है। मैं चाहती हूं कि इन ऐतिहासिक और मित्रतापूर्ण संबंधों को और अधिक निकट, गहरे और सुदृढ़ बनाने में अपना सक्रिय योगदान दूं।
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संस्कृति की भाषा है हिंदी
मुहम्मद सोबित विश्वविद्यालय में फ़ारसी भाषा सीख रहे हैं लेकिन कहते हैं कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और भावनाओं को समझने का एक सशक्त साधन भी है। बांग्लादेश के एमडी आरिफुर रहमान बीटेक के छात्र हैं कहते हैं कि मेरी दूसरी मातृभाषा हिंदी है। बांग्लादेश के ही अरिफुल इस्लाम एमबीए कर रहे हैं और वह हिंदी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना चाहते हैं।
दुनिया को जोड़ सकती है हिंदी
श्रीलंका की कलणि विहंगा पनागॉड विश्वविद्यालय में हिंदी की शोध छात्रा हैं। कहती है कि हिंदी में वह शक्ति है जो पूरी दुनिया को जोड़ सकती है। वह आगे चलकर अपने देश में हिंदी की प्राध्यापिका बनना चाहती हैं। श्रीलंका की ही कांचना दि अल्विस कांचना दि अल्विस कहती है कि हिंदी साहित्य पर बौद्ध संस्कृति का प्रभाव और मानव मुक्ति की परिकल्पना इस विषय पर शोध करते हुए मैं यह जान गई हूं कि हिंदी से जुड़ी भारतीय संस्कृति और सभ्यता के बारे में मेरा ज्ञान कितना सीमित था।
हिंदी सभी को सीखना चाहिए
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माली देश के मोहम्मद अग मोहम्मद दिकको लविवि से बीकॉम की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भी हिंदी ने अपनी ओर आकर्षित किया है। दिकको ने हिंदी सीख लिया है। उन्होंने कहा कि हिंदी सभी को सीखना चाहिए। श्रीलंका की जेजी गयत्रि आशारा बीए कर रही हैं। उनको हिंदी फिल्मों और गानों से लगाव है। हिन्दी सुनते-सुनते मैं समझने लगी। गुंजन रोखो बांग्लादेश के हैं और पत्रकारिता विभाग के छात्र वह हिंदी सीखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता करना चाहते हैं।
