बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों में रोषः ऊर्जामंत्री से न मिल पाने से भड़के कर्मचारी, अब 14 को होगी वार्ता
लखनऊ, अमृत विचार : बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों की विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर संगठन की ओर से सोमवार को ऊर्जा मंत्री से मिलने का प्रयास उस समय विफल हो गया, जब कर्मचारियों के पहुंचने से पहले ही ऊर्जामंत्री राजधानी से बाहर चले गए। इसके चलते बड़ी संख्या में पहुंचे बिजली कर्मचारियों में रोष देखने को मिला। संगठन के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की ओर से अपने ही आदेशों का उल्लंघन करते हुए लगभग 15 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी की गई है।
उन्होंने बताया कि 55 वर्ष की आयु का हवाला देकर हजारों कर्मचारियों को कार्य से हटाया गया है। वहीं 18 सितंबर-25 के आदेश के अनुरूप कार्य के अनुसार अनुबंध नहीं किए गए हैं और न ही 18,000 रुपए न्यूनतम वेतन निर्धारित किया गया है। मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों को अब तक कार्य पर वापस नहीं लिया गया है। इसके अलावा दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण न होना, घायल कर्मचारियों का कैशलेस इलाज न कराया जाना, इलाज में खर्च धनराशि का भुगतान न होना, भ्रष्ट ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई न करना, क्षेत्रीय कार्यालयों में बायोमेट्रिक सिस्टम लागू न होना, मनमानी वेतन कटौती, वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर उत्पीड़न और स्मार्ट मीटर लगने की स्थिति में कर्मचारियों को हटाने जैसी समस्याएं भी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
संगठन महामंत्री ने आगे बताया कि इन मांगों को लेकर ऊर्जा मंत्री के लखनऊ स्थित आवास पर जनता दरबार में ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया था। ऊर्जामंत्री के बाहर जाने के बाद पुलिस प्रशासन ने गौतमपल्ली से प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद खालिद सहित कई पदाधिकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया। बताया गया कि 14 जनवरी को संगठन और ऊर्जामंत्री के बीच वार्ता होना सुनिश्चित किया गया है।
