बरेली: पहली से आठवीं तक के बच्चों को बांट दिए एक ही साइज के स्वेटर

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बरेली,अमृत विचार। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को स्वेटर वितरण में बड़ी लापरवाही सामने आई है। कई बच्चों को अब तक स्वेटर नहीं दिए गए हैं। वहीं, कई जगहों पर पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को एक ही साइज के स्वेटर बांट दिए गए हैं जबकि कक्षावार अलग-अलग साइज के स्वेटर बांटे जाने थे। …

बरेली,अमृत विचार। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को स्वेटर वितरण में बड़ी लापरवाही सामने आई है। कई बच्चों को अब तक स्वेटर नहीं दिए गए हैं। वहीं, कई जगहों पर पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को एक ही साइज के स्वेटर बांट दिए गए हैं जबकि कक्षावार अलग-अलग साइज के स्वेटर बांटे जाने थे। हैरानी की बात तो यह है कि स्कूलों में पहुंचे स्वेटरों का अधिकारियों द्वारा सत्यापन भी कराया जा चुका है।

बरेली में बीके थापर, महालक्ष्मी इंटरप्राइजेज और मयूर सेल्स को स्वेटर वितरण की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें बीके थापर फर्म 50 फीसदी, महालक्ष्मी 30 फीसदी और मयूर फर्म 20 प्रतिशत छात्रों को स्वेटर बांटना था मगर इन फर्मों ने स्वेटर वितरण में खेल कर दिया।

शासनादेश के मुताबिक, कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों के स्वेटर का अलग-अलग साइज तय किया गया था। कक्षा एक व दो के लिए 26-28 नंबर (एस) साइज, कक्षा तीन-चार के लिए 30-32 नंबर (एम) साइज, कक्षा पांच-छह के लिए 32-34 नंबर (एल) साइज और कक्षा सात-आठ के लिए 36-38 नंबर (एक्सएल) साइज के स्वेटर बांटने थे मगर कक्षा एक से आठवीं तक 26 से 32 नंबर तक ही स्वेटर बांटे गए हैं।

हद तो इस बात की है कि फर्मों ने जो स्वेटर बांटे हैं उनके साइज में भी कोई खास अंतर नहीं है। लगभग एक ही साइज के स्वेटर बच्चों को दे दिए गए हैं। ये स्वेटर प्राइमरी के बच्चों के लिए बड़े तो जूनियर के बच्चों के लिए छोटे पड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि उनके स्कूल में भी फर्मों ने 28 नंबर तक के स्वेटर मुहैया कराए हैं जो कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को छोटे पड़ रहे हैं। अधिकारियों ने सत्यापन में भी इन स्वेटरों को सही भी ठहरा दिया है।

सामान्य साइज से दो नंबर कम हैं स्वेटर
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष विनोद कुमार शर्मा का आरोप है कि फर्मों ने जो स्वेटर मुहैया कराए हैं वे सामान्य साइज से भी दो नंबर कम के हैं। जो 28 नंबर का स्वेटर है वह 26 नंबर का है और 30 नंबर का स्वेटर 28 नंबर का है। ऐसे में बच्चों को सही स्वेटर ही नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्यापन के नाम पर अधिकारियों ने सिर्फ खानापूर्ति की है। बिना देखे और जांच किए ही फर्मों को सही ठहरा दिया गया है।

“जिले में करीब 94 फीसदी स्वेटर बांटे जा चुके हैं। स्वेटर एकदम अच्छी क्वालिटी के बांटे गए हैं। इनका सत्यापन भी कराया जा चुका है। यदि किसी भी स्कूल को कोई आपत्ति है तो वह लिखित में शिकायत कर सकता है। उस पर संज्ञान लिया जाएगा।” -विनय कुमार, बीएसए

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