सम्मोहित करता विलक्षण पक्षी सनबिटर्न
क्या कोई पक्षी अपनी चोंच या नुकीले पंजों का प्रयोग किए बिना भी खूँखार शिकारियों को परास्त कर सकता है?सनबिटर्न यह सिद्ध करता है कि भीषण संकट के समय धैर्य और मनोवैज्ञानिक कौशल ही सबसे अचूक प्रहार साबित होते हैं। मध्य और दक्षिण अमेरिका के अभेद्य वर्षावनों में, जहां हर आहट एक नए खतरे का उद्घोष होती है, वहां जीवित रहने के लिए केवल शारीरिक शक्ति पर्याप्त नहीं है|
इन रहस्यमयी जंगलों में एक ऐसा पक्षी निवास करता है, जिसने यह सिद्ध कर दिया है कि बुद्धि का सटीक प्रयोग दुनिया के किसी भी घातक हथियार से अधिक शक्तिशाली हो सकता है| प्रकृति प्रेमी इसे ‘सनबिटर्न’ के नाम से जानते हैं| यह न तो गरुड़ जैसी शक्ति रखता है और न ही चीते जैसी तीव्र फुर्ती, फिर भी इसमें एक ऐसा अनूठा रणकौशल है, जो बड़े-बड़े शिकारियों को किंकर्तव्यविमूढ़ कर देता है| इसकी आत्मरक्षा की यह रणनीति महज जान बचाने की कोशिश भर नहीं है, बल्कि शिकारी के मस्तिष्क को भ्रमित कर देने वाला एक गहरा मनोवैज्ञानिक मायाजाल है|
अदृश्यता का आवरण
प्रकृति में विलीन होना - सनबिटर्न की आत्मरक्षा का प्रथम चरण है पूर्णतः अदृश्य हो जाना| नदी के किनारों पर सूखी पत्तियों और कीचड़ के बीच जब यह पक्षी निश्चल खड़ा होता है, तो इसके धूसर-भूरे पंख इसे परिवेश के साथ इस कदर एकाकार कर लेते हैं कि कोई अत्यंत निकट से भी गुजर जाए, तो इसे पहचान नहीं सकता| विज्ञान की शब्दावली में इसे ‘क्रिप्टिक कलरेशन’ कहते हैं| इसका सीधा अर्थ है स्वयं को परिवेश के रंगों में इस तरह विलीन कर लेना कि शिकारी की दृष्टि आप पर टिक ही न पाए| जब तक संकट टल न जाए, सनबिटर्न किसी पत्थर की भाँति अडिग रहकर अपनी शांति को ही अपनी सबसे अभेद्य ढाल बनाए रखता है|
भ्रम का प्रहार आंखों का धोखा
असली रोमांच तब प्रारंभ होता है जब छिपने का विकल्प समाप्त हो जाता है| जैसे ही कोई भूखा सर्प या जंगली बिल्ली सनबिटर्न के घेरे में प्रवेश करती है, यह शांत पक्षी अचानक रौद्र रूप धारण कर लेता है| यह पलक झपकते ही अपने पंखों को एक विशाल पंखे की भाँति फैला देता है| इस क्षणिक रूपांतरण में वह लघु पक्षी एकाएक एक विशाल और डरावने जीव जैसा प्रतीत होने लगता है| उसके पंखों के भीतर नारंगी, लाल और पीले रंगों के सम्मिश्रण से दो विशाल आकृतियाँ उभर आती हैं, जो हूबहू किसी खूँखार शिकारी की धधकती आँखों जैसी दिखती हैं|
मनोवैज्ञानिक विजय
वैज्ञानिक इन आकृतियों को ‘आई-स्पॉट्स’ कहते हैं| एक सुलभ शिकार की तलाश में आया शिकारी, अचानक अपने सम्मुख दो विशाल जलती हुई आँखें देखकर स्तब्ध रह जाता है| उसे भ्रम होता है कि वह किसी पक्षी को नहीं, बल्कि किसी ऐसे दैत्यकार जीव को देख रहा है जो स्वयं उसे ही अपना ग्रास बना सकता है| सनबिटर्न यहीं नहीं थमता; वह अपने शरीर को एक विशिष्ट लय में झुकाकर और पंखों को थिरकाकर इस भ्रम को इतना जीवंत बना देता है कि शिकारी भय और अनिश्चितता से घिर जाता है| यही एक क्षण सनबिटर्न की विजय सुनिश्चित कर देता है, और शिकारी अपनी जान बचाकर वहां से भागने में ही अपनी भलाई समझता है|
जीवन का संदेश
सनबिटर्न की यह युक्ति हमें जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाती है| यह सिखाती है कि आत्मरक्षा का अर्थ सदैव हिंसा या प्रतिघात नहीं होता| कभी-कभी बिना चोंच चलाए और बिना पंजा मारे, केवल अपनी बुद्धिमत्ता और दृष्टि के छलावे से भी बड़ी जंग जीती जा सकती है| वर्षावनों की सघनता में आज भी यह पक्षी हमें स्मरण कराता है कि जब संकट विकराल हो, तो धैर्य और मानसिक कौशल ही आपके सबसे अचूक प्रहार सिद्ध होते हैं|- डॉ. कैलाश चन्द सैनी, वन्यजीव लेखक, जयपुर
