सखी री बसंत आया
ठंड कमजोर पड़ते ही सूर्य की गर्माहट धरती को सींचने लगती है। इसी क्षण बसंत के आगमन की मधुर आहट सुनाई देने लगती है। बसंत केवल एक ऋ तु नहीं, अपितु नवजीवन, उल्लास और नई शुरुआत का गहन संदेश है। पतझड़ के बाद पेड़-पौधों की नई पत्ती एवं फूलों के साथ प्रकृति का पुनः जागृति होना और खुले आसमान में पक्षियों के झुंड का विचरण ऋतुराज के आरंभ की अनुपम छटा हैं। साथ ही सरसों के पीले खेत लहलहाते हैं, आम के बौर खिल उठते हैं और कोयल की कूक गगन में गूंजती है और अनगिनत फूलों की महक हवा में घुल जाती है, जो वसुंधरा का शृंगार कर बसंत का स्वागत करती है। -अम्बिका कुशवाहा ‘अम्बी’, लेखिका
मानव जीवन में बसंत ऋ तु प्रेम, प्रतीक्षा और मानवता का संदेश लेकर आती है। प्रकृति का नवजीवन, सौंदर्य और उल्लास मानवीय भावनाओं में प्रेम, आशा और करुणा का संचार करता है। बसंत पंचमी ज्ञान एवं चेतना के साथ आध्यात्मिकता का प्रतीक हैं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से बसंत ऋ तु में प्रकृति का यह परिवर्तन जैसे- हरियाली का फैलना, फूलों का खिलना और मौसम का सुहावना होना, जो मानव मस्तिष्क पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव डालता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, यह प्रभाव मुख्य रूप से सूर्य की रोशनी, हार्मोनल बदलाव और पर्यावरणीय उत्तेजनाओं से जुड़ा होता है। इस ऋ तु में सूर्य की अधिक रोशनी से सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो मूड को बेहतर बनाता है, विटामिन डी का उत्पादन बढ़ता है जो प्रतिरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है। यह मौसम अवसाद से राहत देता है और ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है। इसलिए बसंत ऋ तु मस्तिष्क के लिए एक प्राकृतिक ‘मूड बूस्टर’ का काम करती है।
सांस्कृतिक दृष्टि से भारतीय परंपरा में बसंत ऋ तु का विशेष स्थान है। यह ऋ तु न केवल प्रकृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है, बल्कि विभिन्न प्रमुख पावन त्योहारों का केंद्र भी है, जो जीवन, ज्ञान, भक्ति, प्रेम और उल्लास के संदेश लेकर आते हैं। बसंत में मुख्य रूप से बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि और फाल्गुन की होली जैसे त्योहार मनाए जाते हैं। बसंत पंचमी ऋ तुराज बसंत के आगमन की प्रमुख तिथि है। इस दिन विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा होती है, जो ज्ञान एवं रचनात्मकता की प्रतीक है।
महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है। यह भगवान शिव की आराधना का प्रमुख पर्व है। बसंत की इस ऋ तु में यह त्योहार शिव-पार्वती प्रेम और जगत के संतुलन का प्रतीक बन जाता है। फाल्गुन की होली वसंत का सबसे रंगीन और खुशनुमा उत्सव है, जो होलिका दहन से शुरू होकर रंगों की होली तक, यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम, मित्रता और सामाजिक एकता का संदेश देता है। बसंत की बहार में रंगों का यह उत्सव प्रकृति के उल्लास को दर्शाता है। बसंत ऋ तु के सभी त्योहार भारतीय संस्कृति में ज्ञान, भक्ति, मानवता और प्रेम उल्लास की ऊर्जा है, जो सांस्कृतिक रूप से नवीनीकरण, आशा और सामूहिक उत्सव का प्रतीक बनाए रखती है।
बसंत ऋ तु मात्र मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि जीवन का एक जीवंत आह्वान है। जैसे-जैसे ठंडी हवाएं गर्म होकर मधुर बनती हैं, वैसे ही हमारे मन की जड़ता भी पिघलने लगती है। यह ऋ तु अपने अंदर की सुस्ती को त्यागकर, हर पल उत्साह से जीने की प्रेरणा देती है और साथ सिखाती है कि हर एक अंत के बाद नई शुरूआत प्रतीक्षारत होता है। इसलिए जीवन से कभी हार नहीं माननी चाहिए। बसंत ऋ तु धर्म, प्रकृति, संस्कृति और शिक्षा चारों को एक सूत्र में पिरोता है और प्रेम, आध्यामिकता एवं मानवता का संदेश देता है। वसंत जीवन में एक नई शुरुआत का भी शुभ संदेश देता है।
