UP: मशहूर शायर ताहिर फराज का मुंबई में निधन, गम में डूबा उर्दू साहित्य जगत
रामपुर, अमृत विचार। दुनियाभर में मशहूर शायर ताहिर फराज का मुंबई में हृदयगति रुकने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर से उर्दू साहित्य जगत शोक की लहर है। 72 वर्ष की उम्र में उन्होंने मुंबई में आखिरी सांस ली। उनके परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटियां और एक बेटा शामिल हैं।
29 जून 1953 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में जन्मे ताहिर फराज का रामपुर से गहरा नाता रहा है। उनका घर रामपुर में कोतवाली स्थित सर्राफा बाजार में है। वो अपनी मधुर आवाज, कोमल भावों और आध्यात्मिक रंग से काव्य जगत में एक उज्ज्वल सितारे की तरह चमकते रहे। ताहिर फराज अपने परिवार के साथ मुंबई गए थे, जहां वे एक शादी में शामिल होने और अपनी बेटी के ऑपरेशन के लिए ठहरे हुए थे।
शनिवार सुबह उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश तमाम चिकित्सा प्रयासों के बावजूद वे बच नहीं सके और अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए शोक में छोड़ गए। ताहिर फराज ने बहुत कम उम्र में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था और थोड़े ही समय में वे भारत के प्रमुख कवियों में से एक बन गए। सौलत पब्लिक लाइब्रेरी सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य काशिफ खां ने ताहिर फराज के निधन पर शोक जताते हुए बताया कि गजलें हों, भजन हों, नात हों, सलाम हों या मनकबत हों। उनकी विशिष्ट शैली, जोश और संगीतमयता ने हर वर्ग के श्रोताओं के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।
गायन में उनका कोई सानी नहीं था और खानकाह नियाज़िया बरेली से उनके जुड़ाव ने उनकी कविताओं को आध्यात्मिक गहराई प्रदान की। समय बीतने के साथ-साथ, उन्हें भारत के प्रतिनिधि कवियों में से एक माना जाने लगा। ताहिर फराज का अंतिम संस्कार मुंबई में ही किए जाने की तैयारी हो रही है। उन्होंने बताया कि ताहिर फराज का निधन केवल एक व्यक्ति का अंत नहीं, बल्कि एक पूरे युग का, एक सांस्कृतिक आवाज़ का और उर्दू कविता के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। उनके निधन से गजलें खामोश हो गई हैं और शब्द अनाथ हो गए हैं।
