कानपुर : पुराने गंगा पुल के नीचे नाव सजाकर जश्न, गंगा में अर्जी लगाई, मौलाना बोले- इमाम मेंहदी जिंदा हैं

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Published By Deepak Mishra
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इमाम मेंहदी के जश्न-ए-विलादत पर बड़ी करबला में केक काटा

कानपुर, अमृत विचार। इमाम मेंहदी अलैहस्सलाम की विलादत (जन्मदिन) पर बड़ी कर्बला में केक काटा गया। पुराने गंगा पुल के नीचे नाव को सजाकर उसपर जश्न मनाया गया और मन की मुरादें पाने के लिए गंगा में अर्जी भी लगाई गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में शिया समुदाय की महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग पहुंचे और वहीं महफिल भी सजाई। ऑल इंडिया शिया यूनिट की जानिब से देर रात बड़ी करबला नवाबगंज में दुआ मुनाजात और नज्र का आयोजन किया गया।

नज्र के बाद केक काटकर जश्न मनाया गया। इस मौके पर शिया ओलेमा बोर्ड के महासचिव मौलाना अलमदार हुसैन ने बताया की 15 शाबान को आखिरी इमाम मेहदी अलैहस्सलाम की विलादत हुई थी। उन्होंने कहा की आप (इमाम मेहदी अलैहस्सलाम )आज भी जिंदा हैं और अल्लाह के हुक्म से पर्दे में हैं, जिस दिन दुनिया में ज़ुल्म हद से ज्यादा बढ़ जाएगा उस दिन अल्लाह के हुक्म से वो जहूर (सामने आना) करेंगे और इस दुनिया में इंसाफ का राज कायम करेंगे।

मौलाना ने कहा कि हर धर्म में इस बात का उल्लेख किया गया है कि ईश्वर का एक अवतार भविष्य में आएगा और इस दुनिया में सतयुग का राज कायम करेगा। बड़ी कर्बला के मुतवल्ली काशिफ नकवी की ओर से लंगर बांटा और आने वाले मोमनीन का स्वागत किया। इस मौके पर नायाब आलम, शहादत रिज़वी, जमील हुसैन, वहदत काजमी, शारिब अब्बास, तहसीन हैदर, आमिर अब्बास, नजर अब्बास, शाहिद अली, आफताब हुसैन आदि मौजूद रहे।

इस सिलसिले में गुलामाने इमामे जमाना बजरा कमेटी की जानिब से पुराने गंगा पुल के नीचे नाव सजाकर गंगा किनारे जश्न मनाया गया। कमेटी संयोजक सालिम रिजवी ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि आज के दिन जो भी दुआ अर्जी में लिख कर गंगा में डाली जाती है वो जरूर पूरी होती है।

यही वजह है कि गंगा पुल के नीचे बड़ी संख्या में महिला, पुरूष, बच्चे, बुजुर्ग सभी पहुंचे और अपनी मुरादों की पर्ची गंगा में डाली। गंगा किनारे महफ़िल और नज़्र का भी एहतिमाम किया गया जिसमें तमाम शायरों ने मौला की बारगाह में नजराने अकीदत पेश किया। इस मौके पर अतहर अब्बास, वसी रजा, शाहिद रजा, इकराम अब्बास, इनाम अब्बास, नासिर हुसैन आदि मौजूद रहे।

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