दहशतगर्दी का खात्मा : 127 दिन में 19 बदमाश ढेर, कुख्तात बदमाश रहे पुलिस-एसटीएफ के निशाने पर
लखनऊ, अमृत विचार। बीते दिनों लखनऊ, बिजनौर समेत कुछ जिलों में बदमाशों ने लूट की वारदातों को अंजाम देकर जमकर दहशत फैलाई, वहीं पुलिस और एसटीएफ भी बदमाशों को ढेर करने में पीछे नहीं रही। 3 फरवरी को एसटीएफ ने बनारस में एक लाख के इनामी बनारसी यादव और 6 फरवरी को पुलिस ने शामली में दिल्ली निवासी 50 हजार के इनामी बदमाश रिहान को ढेर कर दिया।
यह दो मामले तो बानगी भर हैं। दरअसल पिछले 127 दिन में पुलिस ने बदमाशों की दहशतगर्दी के खात्मे के लिए ताबड़तोड़ एनकाउंटर किए। 28 सितंबर-2025 से छह फरवरी-2026 तक पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर 19 बदमाशों को ढेर कर दिया। हालांकि इन मुठभेड़ों में दर्जन भर पुलिस के जवान भी घायल हुए।
प्रदेश में भाजपा सरकार आई तो क्राइम को लेकर जीरो टालरेंस की नीति पर पुलिस ने काम करना शुरू कर दिया। इसके लिए एनकाउंटर का एक चलन सा शुरू हो गया। हालांकि एनकाउंटर के खिलाफ विपक्षी दल आवाज उठाते रहे हैं। बीते दिनों एक संवैधानिक संस्था ने भी इसके खिलाफ तल्ख टिप्पणी कर डाली। इससे एक बारगी लगा कि एनकाउंटर को लेकर पुलिस बैकफुट पर आ सकती है। लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत।
पुलिस और एसटीएफ का एनकाउंटर अभियान जारी रहा। तीन फरवरी को एक लाख के इनामी कथित सुपारी किलर बनारसी यादव को ढेर कर दिया, वहीं छह फरवरी को दिल्ली से सटे यूपी के शामली में भी पुलिस ने 50 हजार के इनामी बदमाश रिहान को भी मौत की नींद सुला दिया। बनारसी यादव अन्य जघन्य मुकद्मों के साथ ही कोलोनाइजर महेन्द्र गौतम की हत्या का अभियुक्त था, जबकि रिहान के खिलाफ 80 मुकदमे दर्ज थे। हालांकि यह दो मामले तो बानगी भर हैं। पुलिस और एसटीएफ का रिकार्ड खंगाले तो पिछले 127 दिनों में 19 कुख्यात अपराधियों को एनकाउंटर ढेर किया गया है।
इनके हुए एनकाउंटर
28 सितंबर-25 को मुजफ्फरनगर में नईम कुरैशी और तीन अक्टूबर को मेहताब को ढेर कर दिया गया। इसी तरह पांच अक्टूबर को फिरोजाबाद में नरेश पंडित और सहारनपुर में इमरान को पुलिस ने मौत की नींद सुला दिया था। नौ अक्टूबर को बरेली में कुख्यात बदमाश शैतान का एनकाउंटर कर दिया, वहीं 12 अक्टूबर लखनऊ पुलिस ने एक लाख के इनामी मोहम्मद नफीस और 13 अक्टूबर को मेरठ पुलिस ने शहजाद उर्फ निक्की को ढेर कर दिया।
शामली में 18 अक्टूबर एक लाख के इनामी नफीस को, जबकि 23 अक्टूबर को शामली में ही फैसल को मौत की नींद सुला दिया। 12 दिसंबर को शामली पुलिस ने समयदीन और दो दिसंबर को बाबरिया गिरोह के सरगना मिथुन एनकाउंटर में मारे गए। 21 दिसंबर को बुलंदशहर में जुबैर और सहारनपुर में एक लाख के इनामी सिराज को मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया।
पांच जनवरी 26 को सुल्तानपुर में एक लाख का इनामी तालिब को मार गिराया गया, वहीं 23 जनवरी को चित्रकूट में कारोबारी बेटे की 40 लाख की फिरौती के लिए हत्या करने वाले बदमाश कल्लू को ढेर कर दिया। तीन फरवरी को एक लाख के इनामी कुख्यात बनारसी यादव और छह फरवरी को शामली में रिहान के अलावा दो बदमाशों को भी पुलिस ने अन्य मुठभेड़ में मार गिराया।
एनकाउंटर को आम तौर पर पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ को ही कहा जाता है। पूर्व में आईपीसी और अब बीएनएस में भी पुलिस को आत्मरक्षा का अधिकार है। कभी- कभी आत्मरक्षा करते समय ही बदमाश ढेर हो जाते हैं, वहीं पुलिस कर्मी भी हताहत होते हैं। जब एनकाउंटर में कोई बड़ा बदमाश ढेर होता है तो जनता में सुरक्षा का अहसास पैदा होता है। जनता पुलिस की हीरोज्म की छवि को पसंद करती है। हालांकि यह अलग बात है कि इसके कानूनी पहलू कुछ भी हो सकते हैं... सुनील कुमार गुप्ता, पूर्व अपर पुलिस महानिदेशक, यूपी
