Bareilly : ईंटों की पक्की दीवार पर टिनशेड डालकर हो रही थी नमाज
बरेली, अमृत विचार। प्रशासन का दावा है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करके भोजीपुरा स्थित पिपरिया गांव में विपक्षियों ने सरकारी जमीन पर अस्थायी मस्जिद बना रखी थी। ईंटों की पक्की दीवार पर टिनशेड डाल रखा था। जहां पर गांव के लोग नमाज अदा कर रहे थे। विपक्षियों के कोर्ट से मुकदमा हारने के बाद सदर प्रशासन की टीम ने शनिवार को बुलडोजर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की और मस्जिद को जमींदोज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।
तहसील प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी बंजर भूमि पर बनी थी। कोर्ट के आदेश पर अवैध ढांचे को ध्वस्त कर सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है। इस भूमि को लेकर कानूनी विवाद 23 साल से चल रहा था। ग्राम सभा ने अवैध कब्जे के खिलाफ 2002 में तहसीलदार सदर कोर्ट में वाद दाखिल किया था। तहसीलदार कोर्ट ने 10 जनवरी 2003 में ग्राम सभा बनाम मोहम्मद बक्श में बेदखली आदेश पारित किया था। उसके बाद यह मामला अपर जिला जज/फास्ट न्यायालय कोर्ट-एक में चला, जहां से 28 अक्तूबर 2025 को भी पारित आदेश में तहसीलदार कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए वादी पक्ष का मुकदमा खारिज हो गया था। इसके बाद प्रशासन की टीम ने कार्रवाई की है।
कार्रवाई के दौरान छावनी में बदल दिया गांव
प्रशासनिक टीम पुलिस और पीएसी के जवानों के साथ शनिवार दोपहर मौके पर पहुंची। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए गांव को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया। गांव के प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई और बाहरी लोगों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी गई। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी। फिलहाल गांव में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है, सतर्कता के लिहाज से गांव में पुलिस और पीएसी तैनात है। पुलिस-प्रशासनिक अफसर लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
गांव के बाहर रोके गए भीम आर्मी के नेता
सरकारी बंजर जमीन पर कब्जा करके बनाई गई मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की सूचना मिलने पर भीम आर्मी के कुछ नेता और कार्यकर्ता गांव पहुंचने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें मौके पर पहुंचने से पहले ही गांव के बाहर रोक लिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश पर की जा रही है, इसलिए किसी भी प्रकार के राजनीतिक या संगठनात्मक हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। मस्जिद को गिराने के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सीओ हाईवे के नेतृत्व में कई थानों की फोर्स और पीएसी के जवानों ने पूरे इलाके को घेरे रखा था।
