UP Budget Session 2026: राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सपा विधायकों का जोरदार हंगामा, 'गो बैक' के गूंजे नारे

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र की शुरुआत आज राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के साथ हुई, लेकिन सदन में पहले मिनट से ही हंगामे का माहौल बन गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने पहले से तय रणनीति के तहत जमकर नारेबाजी की और राज्यपाल के भाषण के दौरान लगातार 'गो बैक, गो बैक' के नारे लगाए।

विपक्ष का आक्रामक रुख

राज्यपाल के अभिभाषण शुरू होते ही विपक्षी विधायक खड़े हो गए। सपा विधायकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए और सदन की कार्यवाही में रुकावट डाली। नारेबाजी इतनी तेज थी कि राज्यपाल के कई महत्वपूर्ण बयानों को सुनना मुश्किल हो गया। विपक्ष का मुख्य निशाना मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियां, फार्म-7 की प्रक्रिया और अन्य जन-मुद्दे रहे।

राज्यपाल के प्रमुख बयान

अभिभाषण के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में छह करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया है। उन्होंने प्रदेश में विकास, निवेश, रोजगार सृजन और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए हुई प्रगति का जिक्र किया। हालांकि विपक्ष की नारेबाजी के कारण अभिभाषण का पूरा प्रभाव सदन में नहीं दिख सका।

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सत्र का आगे का कार्यक्रम

- राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन में इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाएगा।
- मंगलवार को पूर्व एवं वर्तमान दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
- बुधवार को वित्त मंत्री द्वारा 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा।

विपक्ष ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में एसआईआर, महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, कोडीन सिरप तस्करी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरना जारी रहेगा। पहले दिन का यह हंगामा सत्र के शेष दिनों में और तेज बहस की ओर इशारा कर रहा है।

बजट सत्र के पहले दिन ही विधानसभा में हंगामे का माहौल बन गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और फार्म-7 के मुद्दे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सपा विधायक जाहिद बेग नारे लिखी तख्तियां लेकर सदन में पहुंचे और लगातार नारेबाजी की।

लेजिस्लेचर लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है, रुकावट नहीं बल्कि संवाद से चलता है: सीएम योगी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र के पहले दिन विधानमंडल की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि विधानसभा और विधान परिषद लोकतंत्र के चार मजबूत स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन संवाद, बहस और विचार-विमर्श से कार्य करता है, न कि हंगामे या कार्यवाही में बाधा डालकर।

हंगामा मुद्दों को कमजोर करता है: योगी

सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर कोई सदस्य किसी गंभीर मुद्दे को उठाना चाहता है, तो सदन की कार्यवाही में रुकावट डालना उसी मुद्दे को कमजोर करने की कोशिश के समान है। लोकतंत्र में असहमति का स्थान है, लेकिन वह असहमति रचनात्मक और संवादपूर्ण होनी चाहिए।”

उन्होंने विधायकों से अपील की कि वे जनता के हित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा करें, ताकि प्रदेश के विकास को नई गति मिल सके।

पहली बार सदन में पेश होगा इकोनॉमिक सर्वे

मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आज राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के बाद उत्तर प्रदेश का इकोनॉमिक सर्वे भी सदन में पेश किया जाएगा।  

उन्होंने इसे ऐतिहासिक कदम करार देते हुए कहा, “यह पहली बार है जब कोई राज्य सरकार अपनी आर्थिक उपलब्धियों को इस तरह व्यवस्थित और विस्तृत रूप से सदन के समक्ष रख रही है। हम यह दिखाना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश ने पिछड़ेपन को पीछे छोड़कर देश की अर्थव्यवस्था में एक मजबूत और सफल भूमिका निभाई है।”

सीएम ने कहा कि इस इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट में प्रदेश की आर्थिक प्रगति, निवेश, रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और विभिन्न क्षेत्रों में हुई तरक्की के आंकड़े शामिल होंगे।  

“यह रिपोर्ट न केवल राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान, बल्कि बजट चर्चा में भी सभी सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी। जनप्रतिनिधि और प्रदेशवासियों को उत्तर प्रदेश की इस आर्थिक यात्रा के बारे में पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।”

सदन में डेटा आधारित बहस की अपील

योगी आदित्यनाथ ने सभी विधायकों से आग्रह किया कि वे इस सर्वे के आंकड़ों का उपयोग कर रचनात्मक बहस करें। उन्होंने कहा कि डेटा और तथ्यों के आधार पर चर्चा से ही नीतियां और योजनाएं और प्रभावी बनती हैं।

बजट सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री का यह बयान विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार की रणनीति को भी दर्शाता है। जहां एक तरफ विपक्ष एसआईआर, महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर हमला बोलेगा, वहीं सरकार इकोनॉमिक सर्वे के जरिए अपनी उपलब्धियों को मजबूती से पेश करने की तैयारी में है।

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सपा-कांग्रेस का संयुक्त विरोध

सपा के इस प्रदर्शन को कांग्रेस ने भी खुलकर समर्थन दिया। कांग्रेस की नेता विधान मंडल दल आराधना मिश्रा 'मोना' ने सपा विधायकों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और विरोध जताया। दोनों विपक्षी दलों ने एसआईआर में कथित गड़बड़ियों, नाम कटवाने और फार्म-7 की प्रक्रिया को लेकर सरकार पर हमला बोला।

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चौधरी चरण सिंह प्रतिमा पर प्रदर्शन

बजट सत्र शुरू होने से पहले सपा के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के पास जुटकर प्रदर्शन किया। यहां भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। सपा ने इसे 'लोकतंत्र पर हमला' करार देते हुए मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बनाई है।

साइकिल से सदन पहुंचे सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा

सपा के विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा इस बार साइकिल से विधानसभा पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे वाराणसी में मंदिर तोड़ने के मामले को सदन में प्रमुखता से उठाएंगे। उनका यह पर्यावरण-अनुकूल और संदेशात्मक अंदाज चर्चा का विषय बन गया।

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सत्र का आगे का कार्यक्रम

- आज: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण, जिसमें सरकार की उपलब्धियां और योजनाओं का जिक्र होगा। अभिभाषण के बाद विधायी कार्य निपटाए जाएंगे।

- मंगलवार: पूर्व एवं वर्तमान दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि के बाद कार्यवाही बुधवार तक स्थगित।

- बुधवार: वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा।

विपक्ष ने पहले से ही एसआईआर, कोडीन कफ सिरप तस्करी, बेरोजगारी, महंगाई, महिला सुरक्षा, खाद संकट जैसे कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान हंगामे की आशंका बनी हुई है।

विधानभवन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, लेकिन विपक्ष का आक्रामक रुख साफ दिख रहा है। बजट सत्र के पहले दिन का यह हंगामा आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।

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