वेतन न मिलने से परेशान NHM संविदा कर्मी, संघ ने की सरकार से हस्तक्षेप की मांग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को दिसंबर 2025 से वेतन न मिलने के कारण हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के समक्ष कड़ा विरोध जताते हुए तत्काल समाधान की मांग की है।
संघ के अध्यक्ष डॉ. अनिल गुप्ता और महामंत्री योगेश उपाध्याय की ओर से उपमुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि एनएचएम के तहत कार्यरत अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मी पूरी तरह अपने मासिक वेतन पर निर्भर रहते हैं। लगातार दो माह से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, भोजन, दवा और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। संगठन का कहना है कि इससे न केवल कर्मियों का मनोबल टूट रहा है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता भी प्रभावित हो रही है।
पत्र में महराजगंज की एक गंभीर घटना का उल्लेख किया गया है, जहां 8 फरवरी 2026 को एक कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) ने लंबे समय से वेतन न मिलने की निराशा और मानसिक दबाव के चलते आत्महत्या का प्रयास किया। हालांकि समय रहते सहकर्मियों ने हस्तक्षेप कर उसकी जान बचा ली। संघ के अनुसार यह घटना प्रदेश भर में कार्यरत लगभग एक लाख संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की मानसिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति की गंभीरता को उजागर करती है।
संघ ने सरकार से मांग की है कि लंबित वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए, भविष्य में वेतन भुगतान के लिए स्थायी और समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा संविदा कर्मियों की अस्थायी प्रणाली पर पुनर्विचार कर स्थायी नीति बनाई जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और संबंधित विभागों की होगी।
