UP: बाबूगिरी संभलता है चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, पत्नी बनी करोड़पति तो आई घोटाले की बू...सीडीओ ने मांगी रिपोर्ट

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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पीलीभीत, अमृत विचार। डीआईओएस कार्यालय में सालों से अटैचमेंट पर लेखाकार की जिम्मेदारी संभाल रहे बीसलपुर के एक इंटर कॉलेज में तैनात चर्चित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम की  पत्नी के बैंक खाते ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में बड़े घोटाले की ओर इशारा कर दिया है। कर्मचारी की पत्नी के खाते में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़े 21 एनईएफटी के माध्यम से 24.27 लाख रुपये की धनराशि हस्तारिंत होना पाई गई हैं।

इन एनईएफटी को लेकर बैंक को संदिग्धता लगी, तो खाते का स्टेटमेंट चेक कराया गया। जिससे देखकर बैंक कर्मियों के भी होश उड़ गए। उस खाते में एक करोड़ से अधिक धनराशि होना पाया गया। इस पर बैंक की ओर से डीएम और ट्रेजरी को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया गया। फिलहाल अब सीडीओ ने डीआईओएस को पत्र भेजकर इस मामले में दो दिन में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के बाद खाते को फ्रीज कर दिया गया है।

बता दें कि लंबे समय से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तैनात इल्हाम शम्सी संबद्ध चल है। उसकी मूल तैनाती बीसलपुर के जनता इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी पद पर है। डीआईओएस कार्यालय में उक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लेखाकार बनकर काम संभाल रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा में इल्हाम की पत्नी अर्शी खातून का बचत खाता संचालित हो रहा है। बताते हैं कि 17 दिसंबर 2025 को बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से जिलाधिकारी को इल्हाम की पत्नी अर्शी खातून के खाते में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़ी 21 एनईएफटी का जिक्र किया गया। 

रिपोर्ट के अनुसार अर्शी खातून के बचत बैंक खाते में तीन दिसंबर 2025 को 21 एनईएफटी के माध्यम से कुल 24,27,920 रुपये हस्तांतरित किए गए। बैंक की आंतरिक जांच में सामने आया कि छह जून 2024 से अब तक खाते में कुल 1,01,95,135 रुपये जमा किए जा चुके हैं। बैंक प्रबंधन के अनुसार खाते से अब तक 36,41,885.56 रुपये यूपीआई लेनदेन के जरिए निकाले जा चुके हैं, जबकि वर्तमान में खाते में 66.18 लाख से अधिक रुपये शेष हैं। संदिग्ध गतिविधि की आशंका पर बैंक ने खाते को फ्रीज कर दिया है ताकि आगे कोई निकासी न हो सके। 

डीएम ज्ञानेंद्र सिंह की ओर से कोषागार से इस खाते से जुड़ी रिपोर्ट मांगी गई। वरिष्ठ कोषाधिकारी की ओर दी गई रिपोर्ट में बताया कि तीन दिसंबर को किए गए 21 एनईएफटी हस्तांतरण जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय से संबंधित हैं। मामला सामने आने के बाद  सीडीओ राजेंद्र श्रीवास की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षक से दो दिन के भीतर जवाब तलब किया गया है। आखिरकार सरकारी धनराशि का प्रयोग निजी खाते में कैसे किया गया है।  इसे लेकर खलबली मच गई है। मामला संज्ञान में आने के बाद विभाग में खलबली है।

निजी खाते में कैसे हस्तांरित हुई सरकारी रकम
सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी कार्यालय से जुड़े एनईएफटी एक निजी खाते में कैसे और किन परिस्थितियों में हस्तांतरित हुए। यदि प्रारंभिक जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भी मुश्किल बढ़ना तय मानी जा रही है। फिलहाल बैंक, कोषागार और जिला प्रशासन की संयुक्त जांच की दिशा में मामला आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

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