UP: सीएचसी में एमओआईसी से नोकझोंक, सपा विधायक के दामाद गिरफ्तार
बबराला, अमृत विचार। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुन्नौर में बुधवार सुबह करीब 11:15 बजे उस समय हाईवोल्टेज ड्रामा हो गया, जब प्रभारी चिकित्साधिकारी और सपा विधायक के दामाद के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। विधायक पुत्री अस्पताल में संविदा चिकित्सक हैं। उनकी लेट-लतीफी को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते तकरार में बदल गया। पुलिस ने मामला शांत कराया। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया, लेकिन पुलिस ने विधायक के दामाद को गिरफ्तार कर शांति भंग में चालान कर दिया।
गुन्नौर से सपा विधायक रामखिलाड़ी यादव की बेटी डा. अनीता गुन्नौर सीएचसी में संविदा चिकित्सक हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर ने बताया कि डॉ. अनीता के अस्पताल समय से न पहुंचने पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए समय की पाबंदी को कहा था। बुधवार सुबह करीब सवा 11 बजे डॉ. अनीता अपने पति अनिल यादव के साथ प्रभारी चिकित्साधिकारी के कक्ष में पहुंचीं। इस दौरान अनिल यादव ने अपनी पत्नी को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और मामला इतना बढ़ गया कि दोनों कक्ष से बाहर आ गए।
इस दौरान दोनों के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए। हंगामे के चलते सीएचसी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मरीज और तीमारदार तमाशबीन बने रहे। करीब आधे घंटे तक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया । इसके बाद दोनों पक्ष कोतवाली पहुंच गए। काफी देर तक चली वार्ता के बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया, लेकिन पुलिस ने एहतियातन विधायक के दामाद अनिल यादव के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर एसडीएम कोर्ट में पेश किया। प्रभारी चिकित्साधिकारी का आरोप है कि अनिल यादव ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत करा दिया गया है । किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक संदीप मलिक ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इस पर नजर रखी जा रही है। इधर, विधायक पुत्री और सीएचसी के महिला विंग में नियुक्त डॉ. अनीता का कहना है कि वह समय पर अस्पताल पहुंच कर कार्य निर्वहन करती रही हैं। लेट पहुंचने का आरोप निराधार है। उन्होंने कहा कि सीएचसी में प्रसूताओं के आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थी जिससे खुन्नस खाए प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर उन्हें प्रताड़ित करते थे। बहरहाल ये मामला जिले के सियासी हलकों में चर्चा में है।
