सेवा तीर्थ से होगा देश का विकास: पीएम मोदी ने किया नए नाम का अनावरण, जानिए नार्थ-साउथ से कितना है अलग
दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित हैं। दिल्ली को औपचारिक रूप से भारत की आधुनिक राजधानी बनाए जाने के 95 वर्ष पूरे हो गए। नयी दिल्ली को 13 फरवरी, 1931 को देश की राजधानी बनाए जाने के समारोह के बाद से बहुत कुछ बदल चुका है। भारत को 1947 में स्वतंत्रता मिली, तीन साल बाद देश गणतंत्र बना और वह अब अपनी राह स्वयं तय कर रहा है। इन निर्णायक पड़ावों के दौरान राजधानी के केंद्र में स्थित रायसीना हिल परिसर समय का मूक प्रहरी बनकर खड़ा रहा है।
शुक्रवार को यह प्रतिष्ठित स्थल एक और महत्वपूर्ण घटना का साक्षी बनेगा जब इसके निकट स्थित नये पीएमओ भवन और कर्तव्य भवन 1 एवं कर्तव्य भवन 2 का उद्घाटन किया। सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय हैं, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे। कर्तव्य भवन 1 और 2 में कानून, रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि और कई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालय स्थित हैं। जब मोदी सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया, तो यह अवसर केवल प्रतीकात्मक नहीं क्योंकि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक 1931 से सत्ता के केंद्र रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित होंगे। प्रधानमंत्री मोदी का कार्यालय अब रायसीना हिल पर राष्ट्रपति भवन के निकट स्थित औपनिवेशिक काल की साउथ ब्लॉक इमारत से सेवा तीर्थ परिसर में स्थानांतरित हो गया। यह बदलाव 13 फरवरी को हुआ, जब 1931 में नयी दिल्ली को भारत की आधुनिक राजधानी के रूप में औपचारिक रूप से उद्घाटन किए जाने के 95 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री केंद्रीय मंत्रियों मनोहर लाल और जितेंद्र सिंह तथा पीएमओ के शीर्ष अधिकारियों के साथ सेवा तीर्थ परिसर पहुंचे और इस परिसर का उद्घाटन किया जिसमें पीएमओ, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित होंगे। मोदी ने पीएमओ में भगवान गणेश की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और महिलाओं, किसानों, युवाओं और कमजोर तबके के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिये।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और प्रधान सचिव पी के मिश्रा एवं शक्तिकांत दास समेत शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में, प्रधानमंत्री ने प्रत्येक नागरिक को जीवन रक्षक सुरक्षा प्रदान करने और लखपति दीदी की संख्या को दोगुना करके छह करोड़ करने के लिए 'पीएम राहत योजना' की शुरुआत को मंजूरी देने वाली फाइल पर हस्ताक्षर किए।
अधिकारियों ने बताया कि 'पीएम राहत योजना' के तहत, दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि तत्काल चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण किसी की जान न जाए। सरकार ने मार्च 2027 की समयसीमा से एक साल से भी अधिक पहले तीन करोड़ लखपति दीदियों का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। प्रधानमंत्री ने अब मार्च 2029 तक छह करोड़ लखपति दीदियों का एक नया, महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
देवनागरी लिपि में परिसर की दीवार पर अंकित
किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी के रूप में, कृषि अवसंरचना निधि को दोगुना करके दो लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य भारत की संपूर्ण कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है। मोदी ने 10,000 करोड़ रुपये की निधि के साथ 'स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0' को भी मंजूरी दी। एक अधिकारी ने कहा, ''भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को, विशेष रूप से डीप टेक, उन्नत विनिर्माण और अभूतपूर्व प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में, सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ 'स्टार्टअप इंडिया एफओएफ 2.0' को मंजूरी दी है। इससे पहले मोदी ने नए परिसर में सेवा तीर्थ की पट्टिका का अनावरण किया। यह नाम देवनागरी लिपि में परिसर की दीवार पर अंकित है। इसके नीचे 'नागरिक देवो भव' का आदर्श वाक्य लिखा है।
अधिकारियों ने बताया कि 2014 से मोदी सरकार भारत के औपनिवेशिक अतीत से जुड़े प्रतीकों से दूर जाने और मानसिकता में बदलाव लाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय को अब सेवा तीर्थ कहा जाएगा, केंद्रीय सचिवालय भवनों का नाम कर्तव्य भवन रखा गया है और राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया है। इसी क्रम में रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया जा चुका है, जहां प्रधानमंत्री का आवास स्थित है। राजभवन तथा राज निवास का नाम क्रमशः लोक भवन और लोक निवास रखा गया है।
बृहस्पतिवार को पीएमओ से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस इमारत का उद्घाटन भारत की प्रशासनिक शासन संरचना में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी मील का पत्थर है और आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दशकों तक, कई प्रमुख सरकारी कार्यालय और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में कई स्थानों पर स्थित पुरानी अवसंरचना से काम करते रहे। इसमें कहा गया है कि इस कारण परिचालन में अक्षमताएं, समन्वय संबंधी चुनौतियां, रखरखाव लागत में वृद्धि और कार्य वातावरण की अनुपयुक्तता की समस्या उत्पन्न हुई। नये भवन परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करके इन समस्याओं का समाधान किया गया है।
भारत की सभ्यतागत यात्रा को दर्शाने वाला
सरकार की योजना नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक में इन प्रतिष्ठित इमारतों को 'युग युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय' में परिवर्तित करने की है जो भारत की सभ्यतागत यात्रा को दर्शाने वाला एक विश्व स्तरीय संग्रहालय होगा।
जब नयी दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी बनाया गया था तब उसका केंद्र रायसीना हिल परिसर था, जिसमें भव्य वायसरॉय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) और नॉर्थ ब्लॉक एवं साउथ ब्लॉक शामिल थे। नयी राजधानी की आधारशिलाएं एक सदी से अधिक पहले किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी ने रखी थीं और इसका उद्घाटन 13 फरवरी, 1931 को वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था।उस वर्ष उद्घाटन समारोह एक सप्ताह तक चला था।
इस दौरान तत्कालीन वायसराय ने 12 फरवरी को 'ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल आर्च' (जिसे अब इंडिया गेट के नाम से जाना जाता है) का भी उद्घाटन किया था जिसे प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) और तृतीय आंग्ल-अफगान युद्ध (1919) में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में बनाया गया था। वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर ने ब्रिटिश राज की नयी राजधानी का निर्माण किया जिसकी भव्यता एवं वास्तुकला यूरोप और अमेरिका के श्रेष्ठ शहरों के बराबर थी। दो विश्व युद्धों के बीच निर्मित इस शहर को बनने में 20 साल से अधिक का समय लगा।
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