Bareilly : शहर की पहचान बताने वाले पार्कों की चमक गायब
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत नगर निगम ने गांधी उद्यान और अक्षर विहार को संवारने में खर्च किए गए थे 14.84 करोड़
बरेली, अमृत विचार। स्मार्ट सिटी परियोजना का सच चमकती लाइटों और रंगीन फव्वारों के दावों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत में नजर आने लगा है। कभी शहर की पहचान बनाने वाले गांधी उद्यान और अक्षर विहार पार्क उपेक्षा का शिकार होकर लोगों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। नगर निगम ने स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत इन दोनों पार्कों को संवारने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन अनदेखी के चलते पार्कों में जुटाई गईं सभी अत्याधुनिक उपकरण बेकार हो चुके हैं। नगर निगम के अफसर भी इन पार्कों के पुन: सौंदर्यीकरण से मुंह चुराने लगे हैं। हालात यह हो चले हैं कि अब लोगों ने यहां पर आना छोड़ दिया है।
नगर निगम ने शहर के दोनों प्रमुख पार्कों गांधी उद्यान और अक्षर विहार को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के नाम पर 14.84 करोड़ रुपये खर्च किए थे, अब स्थिति बदहाल है। हालात यह हैं कि करोड़ों की लागत से लगाए गए सिस्टम ठप पड़े हैं। अक्षर विहार में 8.37 करोड़ रुपये से स्थापित मल्टीमीडिया लेजर फाउंटेन को शहर का नया आकर्षण बताया गया था। उद्घाटन के समय इसकी खूबियां गिनाई गईं थीं, मगर अब न लेजर शो चलता है, न पानी की धार उठती है। शाम के वक्त परिवार और युवा जब उम्मीद लेकर पहुंचते हैं तो उन्हें बंद गेट जैसा सन्नाटा मिलता है।
कुछ इसी तरह गांधी उद्यान की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। यहां 1.64 करोड़ रुपये की लागत से तैयार म्यूजिकल फाउंटेन और साउंड सिस्टम महीनों से निष्क्रिय पड़े हैं। न संगीत की गूंज सुनाई देती है, न रंगीन रोशनी दिखती है। दोनों पार्क के सौंदर्यीकरण पर 83 लाख रुपये और अक्षर विहार के रेन्यूवेशन पर चार करोड़ रुपये अलग से खर्च किए गए, लेकिन रखरखाव की समुचित योजना बनाना शायद किसी की प्राथमिकता में नहीं था। महंगे उपकरण खुले में पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं व तकनीकी सिस्टम जंग की भेंट चढ़ रहे हैं। इधर, अधिकारियों ने कार्यदायी एजेंसियों को नोटिस जारी करने की औपचारिकता निभाई है, लेकिन धरातल पर सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ। करोड़ों की सार्वजनिक धनराशि से तैयार ढांचा शोपीस बनकर रह गया है।
अक्षर विहार में लेजर फाउंटेन और लाइटिंग सिस्टम बंद हैं। करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन पार्क की सुविधाएं निष्क्रिय हैं। परिवार और बच्चे निराश होकर लौटते हैं। स्मार्ट सिटी के दावे सिर्फ दिखावे के लिए हैं, वास्तविकता में जनता को कोई सुविधा नहीं मिल रही। यह पूरी तरह लापरवाही है।- जनिष्ठा सहगल।
गांधी उद्यान का म्यूजिकल फाउंटेन महीनों से काम नहीं कर रहा। पार्क की खूबसूरती बढ़ाने के लिए पैसा खर्च हुआ, लेकिन रखरखाव नहीं। अधिकारी सिर्फ उद्घाटन और फोटो खिंचवाने तक सीमित रहे। जनता की सुविधा पूरी तरह नजरअंदाज की गई है। यह निराशाजनक और अपमानजनक है।-पुनीत यादव।
पार्कों की सुंदरता बनाए रखने के लिए कोई योजना नहीं। अक्षर विहार और गांधी उद्यान दोनों पार्कों की हालत खराब है। करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन सिस्टम बंद हैं। लोग निराश होकर लौटते हैं। यह सीधे जनता के पैसे की बर्बादी और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है।- मिशिका कपूर।
अक्षर विहार के लेजर फाउंटेन और गांधी उद्यान के म्यूजिकल फाउंटेन महीनों से बंद पड़े हैं। पार्कों की सुंदरता को बनाए रखने के लिए कोई रणनीति नहीं है। स्मार्ट सिटी सिर्फ दिखावा सिटी है। अधिकारियों का काम सिर्फ उद्घाटन करना और दिखावा करना ही रह गया है।-दीपक।
फैक्ट फाइल
-7.59 करोड़ पुरानी जेल में लाइट एंड साउंड शो लगा
-8.37 करोड़ में अक्षर विहार में मल्टी मीडिया लेजर सिस्टम, फाउंटेन लगा
-85 लाख में गांधी उद्यान में म्यूजिकल सिस्टम लगा
-79 लाख में म्यूजिक फाउंटेन लगा
-4.09 करोड़ में अक्षर विहार का रेन्यूवेशन हुआ
-83 लाख में गांधी उद्यान का ब्यूटीफिकेशन किया
गांधी उद्यान और अक्षर विहार पार्क में लगे म्यूजिकल फाउंटेन और साउंड सिस्टम आदि को जल्द ही ठीक कराया जाएगा। चूंकि दोनों परियोजनाओं में लगे उपकरणों को गारंटी अवधि खत्म हो चुकी है, इसलिए नए सिरे से मरम्मत आदि का प्रस्ताव तैयार कर मांगा गया है। -संजीव कुमार मौर्य, सीईओ स्मार्ट सिटी।
