कानपुर : अगर इन बीमारियों का है लक्ष्ण तो होली में रहे सतर्क, नहीं तो पड़ जाएंगे लेने के देने...

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर, अमृत विचार। होली पर रंग और हुड़दंग के बीच शरीर का भी खास ख्याल रखने की जरूरत है। खासतौर पर ऐसे लोगों को जो पहले से ही बीपी और शुगर जैसे रोगों का सामना कर रहे हैं। उधर डॉक्टर होली में रंग खेलते हुए खासतौर पर आंखों और त्वचा का भी रखरखाव किए जाने के लिए भी सलाह दे रहे हैं। जिससे होली का पर्व बीमारी को और न बढ़ाने का काम करें। 

होली का पर्व शहर में गंगा मेला तक आयोजित होता है। छह दिनों तक त्योहारों की मस्ती के बीच कई बार ऐसा होता है जो लंबे समय से चले आ रहे परहेज को तोड़ देता है। खासतौर पर शुगर व बीपी के मरीजों को ऐसे में विशेष सतर्कता की जरूरत पड़ती है। उधर रंग के हुड़दंग के बीच कई बार लोग कैमिकल रंगों का प्रयोग भी करते हैं। जिससे सबसे अधिक आंख और त्वचा संबंधी समस्याएं रंग खेलने के बाद पैदा हो जाती है।

उधर बुजर्ग और बच्चे भी इस पर्व के दौरान अक्सर प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि पर्व के दौरान या उसके बाद मरीजों की संख्या में अमूमन इजाफा देखने को मिलता है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मनमीत सिंह का कहना है त्याहारों पर लोग यदि अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखे तो वे लापरवाही की वजह से पैदा होने वाली कई शारीरिक समस्याओं से बच सकते हैं। 

मौसम में भी बदलाव

होली पर मौसम भी बदल रहा होता है। इस बदल रहे मौसम में सबसे अधिक ऐसे लोग प्रभावित होते हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। शुक्रवार की बात की जाए तो शहर में अधिकतम पारा सामान्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। इस तरह से अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। उधर न्यूनतम तापमान 12.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि होली तक शहर में तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस का बदलाव संभव हो सकता है। तापमान में यह बदलाव भी लापरवाही बरतने पर शरीर को संकट में डाल सकता है।    

शुगर के मरीज रखे ख्याल

होली के पकवानों को सीमित मात्रा में खाना चाहिए, जिससे ब्लड शुगर लेवल न बढ़े। इसके अलावा यदि संभव हो तो गुड़, खजूर, किशमिश और सूखी अंजीर जैसे प्राकृतिक मिठाइयों का सेवन करें। पर्याप्त पानी पीते रहना चाहिए जिससे शरीर हाइड्रेटेड रहे। यदि संभव हो तो पर्व में भी अपना व्यायाम और योग जारी रखे, उसमें कोताही बरतने से नुकसान हो सकता है।

यदि परहेज टूट गया है तो रोजाना के मुकाबले अधिक पैदल चले। किसी भी सूरत में अपनी दवाइयों को ब्रेक न करें, समय में परिवर्तन भी शुगर लेवल बढ़ा सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा में कोई बदलाव न करें। तले-भुने खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है, इसलिए इनसे बचाव करना चाहिए। इसके अलावा फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे गाजर, बीन्स, को सलाद में शामिल करने से लाभ हो सकता है। 

बुजुर्गों के लिए खास 

मौसम के बदलाव के बीच पर्याप्त पानी पीते रहना चाहिए। धूप से बचाव करना चाहिए। ताजा आहार लेना चाहिए इसके अलावा फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन को भोजन में शामिल करें। चिप्स व पापड़ का कम सेवन करना चाहिए। अधिक पुरानी गुझिया के सेवन से बचे। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचाव करना चाहिए। 

हाई बीपी के मरीज रहे सतर्क

होली के नमकीन पकवानों में नमक की मात्रा कम रखें, ताकि ब्लड प्रेशर न बढ़े। गुड़, खजूर, किशमिश और सूखी अंजीर जैसे प्राकृतिक मिठाइयों का सेवन कर सकते हैं। पर्याप्त पानी पिएं, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। उत्साह में दवाइयां लेना नहीं भूलना चाहिए। तले-भुने खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, इसलिए इनसे बचें। होली के दौरान तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। 

त्वचा का रखे ख्याल 

होली में रंग खेलने से पहले त्वचा को अच्छी तरह से मॉइस्चराइज करें, ताकि रंग त्वचा में न जाए। सनस्क्रीन लगाएं, ताकि धूप और रंग से त्वचा का बचाव हो। होली से पहले ऑयल मसाज करें, ताकि त्वचा को रंग से बचाया जा सके। रंग खेलने के बाद तुरंत रंग को धोएं, ताकि त्वचा पर रंग न जमे। रंग धोने के लिए मिल्ड क्लींजर का उपयोग करें, ताकि त्वचा को नुकसान न हो। रंग धोने के बाद त्वचा को अच्छी तरह से मॉइस्चराइज रखें, ताकि त्वचा सूख न जाए।

नेत्रों का रखे ख्याल 

रंग व गुलाल जब उड़ रहा है तो आंखों को बंद रख लेना चाहिए। जिससे रंग आंखों में न जाए। सनग्लास पहनें ताकि रंग आंखों में न जाए और धूप से भी बचाव हो। अगर रंग आंखों में चला जाए तो तुरंत पानी से धोना चाहिए। आंखों को न रगड़ें, ताकि नुकसान न हो। आंखों को साफ रखें और किसी भी तरह की परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।  

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