Uttrakhand: वन विभाग ने ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा भैंसे को निवाला बनाने वाला बाघ
हल्द्वानी, अमृत विचार। आखिरकार तीन सप्ताह तक चुनौती बना बाघ, वन विभाग की पकड़ में आ गया है। बाघ को कॉर्बेट नेशनल पार्क ढेला रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। साथ ही बाघ के डीएनए सैंपल भी जांच के लिए भेजे जा रहे हैं ताकि तस्दीक हो सके कि दोनों महिलाओं को मारने वाला बाघ यही है।
वन अधिकारियों के अनुसार, रामनगर वन डिवीजन की फतेहपुर वन रेंज में बाघ ने दो महिलाओं को निवाला बना दिया था। तब से वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए पिंजड़े लगा दिए थे, साथ ही पशु चिकित्सकों के नेतृत्व में दो टीमें बाघ की तलाश कर रही थी। वन विभाग ने पनियाली के जंगलों में पिंजड़ा लगाया था जिसमें भैंस को रखा था। बीते सोमवार की रात को बाघ पहुंचा और भैंस को खाकर चला गया लेकिन पिंजड़े में नहीं फंसा।
मंगलवार को टीम घटना स्थल के समीप बने मचान में बैठी थी, तभी बाघ के आने की हलचल हुई। लगभग 30-40 मीटर की दूरी पर बाघ दिखाई दिया, वैसे ही डॉ. दुष्यंत शर्मा ने ट्रैंकुलाइज गन से बेहोश करने के लिए डॉट का निशाना लगाया। डॉ. शर्मा का निशाना सीधे बाघ के लगा और उसने भागने की कोशिश की। कुछ दूरी पर जाकर बाघ बेहोश होकर गिर गया। टीम ने सर्च शुरू की तो कुछ दूरी पर बाघ झाड़ियों में पड़ा मिला। टीम ने बाघ को रेस्क्यू कर तत्काल कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढेला रेस्क्यू सेंटर भेजा है। अब उसके डीएनए सैंपल लेकर जांच के लिए जांच के लिए भेजे जा रहे हैं ताकि महिलाओं को निवाला बनाने वाले बाघ का पता चल सके।
12 और 25 फरवरी को दो महिलाओं को बनाया था निवाला
हल्द्वानी : बाघ ने 12 फरवरी को फतेहपुर रेंज के अंतर्गत लामाचौड़ के जंगलों में बहू के साथ घास लेने गई गंगा देवी (66) पत्नी प्रेम भारती निवासी पीपलपोखरा और 25 फरवरी को कमला फतर्याल (55) निवासी कठघरिया को भी निवाला बना लिया था। दोनों घटनाओं से नाराज ग्रामीणों ने जमकर हंगामा काटा था और बाघ को पकड़ने की मांग की थी। इसके बाद वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए पिंजड़े लगाने के साथ ही पशु चिकित्सकों की टीमें भी लगाई थीं।
डीएफओ रामनगर वन डिवीजन ध्रुव सिंह मर्तोलिया ने बताया कि बेशक, फतेहपुर के जंगलों से बाघ को पकड़ लिया गया है, उसके डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं ताकि पता चल सके कि महिलाओं को मारने वाला बाघ यही है। बाघ को ढेला रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। फिलहाल ग्रामीणों से अपील है कि जंगलों में जाने से परहेज करें।
