Bareilly : मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य से चमकीं सुरभि, इस रणनीति से मिली ऑल इंडिया रैंक 14
बरेली, अमृत विचार। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 14 हासिल करने वाली बरेली की सुरभि यादव हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासित दिनचर्या और स्पष्ट लक्ष्य की बड़ी भूमिका रही। सुरभि का मानना है कि यूपीएससी की सिविल सर्विसेज जैसी कठिन परीक्षा में सफलता के लिए धैर्य, निरंतर अभ्यास और सही रणनीति बेहद जरूरी है।
शहर के ग्रीन पार्क के पास बजरंग इंक्लेव निवासी पुलिस अधिकारी राकेश सिंह मूल रूप से अमरोहा के गांव नासिर नगला के रहने वाले हैं। राकेश सिंह की पोस्टिंग 2008 में बरेली में जीआरपी में हुई। इसके बाद से पूरा परिवार बरेली का वासी हो गया। सुरभि की माता अखिलेश गृहणी और भाई राजशेखर यादव आईआईटी रुड़की से एआई इंजीनियर हैं। सुरभि ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बरेली से ही की।
उन्होंने दसवीं एसआर इंटरनेशनल स्कूल से और बारहवीं आर्मी पब्लिक स्कूल से की। बारहवीं में सुरभि ने 96 प्रतिशत के साथ मंडल टॉप किया था। इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चली गईं। दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक और जामिया मिलिया इस्लामिया से परास्नातक करने के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी। सुरभि बताती हैं कि उन्होंने तैयारी के दौरान सबसे पहले सिलेबस को गहराई से समझा और उसी के अनुसार पढ़ाई की योजना बनाई।
उन्होंने एनसीईआरटी की किताबों से बुनियादी अवधारणाएं मजबूत कीं और इसके बाद उन्होंने डेलीबेस, मैंथली बेस स्टडी प्लान बनाया। रोजाना अपने तय लक्ष्य को पूरा करना ही उनका लक्ष्य रहता था। रोजाना अखबार पढ़ना और समसामयिक घटनाओं पर नोट्स बनाना उनकी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने नियमित रूप से मॉक टेस्ट दिए, जिससे समय प्रबंधन और उत्तर लिखने की क्षमता बेहतर हुई। सुरभि का कहना है कि सिविल सर्विसेज परीक्षा में केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास भी उतना ही जरूरी होता है। सुरभि अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, विशेष रूप से अपने पिता को देती हैं, जो पुलिस सेवा से जुड़े हैं।
पिता को समाज की सेवा करते देख ही उनके मन में भी देश के लिए काम करने की प्रेरणा पैदा हुई। सुरभि का संदेश है कि सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को धैर्य रखना चाहिए और असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। उनका कहना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। सिविल सर्विसेज परीक्षा का शुक्रवार को रिजल्ट घोषित होने के बाद बेटी की 14वीं रैंक आने पर मां अखिलेश की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। वह खुश होते हुए बताती हैं कि बेटी ने शुरू से ही सिविल सर्विसेज का मन बना लिया था।
वह अपने लक्ष्य के लिए प्लान भी करती रहती थी। सुरभि शुरू ही से पढ़ाई में होशियार थी। दादा धर्मसिंह ने पोती की सफलता पर खुश होते हुए गांव में किसी से फोन पर बात करते हुए कह रहे थे कि पूरे गांव में मिठाई बांट देना, सबको मिठाई खिलाना, पोती गांव आएगी तो दावत भी करेंगे। फोन पर उधर से बधाई देते हुए आवाज आ रही थी कि आप अब आईएएस के दादा हो गए हैं। इस पर दादा धर्म सिंह का चेहरा खुशी से खिलखिला उठा।
चौथे प्रयास में मिली बड़ी सफलता
सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 14 हासिल करने वाली सुरभि यादव की सफलता के पीछे चार प्रयासों का लंबा संघर्ष छिपा है। पहले प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा (प्री) भी पास नहीं कर पाईं। दूसरे प्रयास में उन्होंने प्री और मुख्य परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन इंटरव्यू में चयन नहीं हो सका। तीसरे प्रयास में फिर से प्री परीक्षा में ही सफलता नहीं मिल पाई। लगातार असफलताओं के बावजूद सुरभि ने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी। आखिरकार चौथे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा में शानदार 14वीं रैंक हासिल कर अपनी सफलता की कहानी लिख दी।
