जनसहभागिता से तय होंगी बिजली की दरें... नोएडा में आज नियामक आयोग के समक्ष उपभोक्ताओं का पक्ष रखेगा उपभोक्ता परिषद

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में बिजली दरों के निर्धारण को लेकर सोमवार को ग्रेटर नोएडा में अहम जनसुनवाई होगी। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सभागार में सुबह 11 बजे से यह जनसुनवाई आयोजित करेगा, जिसमें बिजली कंपनियों के प्रस्तावों और उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

जनसुनवाई में निजी क्षेत्र की पहली बिजली कंपनी नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) तथा पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) द्वारा प्रस्तुत वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) और बिजली दरों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस जनसुनवाई के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा नोएडा पहुंचकर आयोग के समक्ष उपभोक्ताओं का पक्ष मजबूती से रखेंगे। परिषद का कहना है कि बिजली कंपनियां पिछले दरवाजे से दरों में बढ़ोतरी की कोशिश कर रही हैं, जिसे सातवें वर्ष भी सफल नहीं होने दिया जाएगा।

परिषद का दावा है कि वर्तमान में बिजली कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस है। ऐसे में अगले पांच वर्षों तक बिजली दरों में बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं बनता। परिषद का कहना है कि जब कंपनियों के पास पर्याप्त अधिशेष राशि मौजूद है, तब उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं होगा।

जनसुनवाई में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर भी उपभोक्ताओं की नाराजगी प्रमुख मुद्दा बनेगी। परिषद का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के बिजली बिल नेगेटिव आ रहे हैं। वहीं जो उपभोक्ता समय से बिल जमा करते रहे हैं, वे भी अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद रिचार्ज कराने से बच रहे हैं। परिषद ने आरोप लगाया है कि कई स्थानों पर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए और कनेक्शन को प्रीपेड में बदल दिया गया, जो उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है। परिषद ने यह भी सवाल उठाया है कि स्मार्ट मीटर के साथ लगाए गए चेक मीटरों की मिलान रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।

जनसुनवाई में नोएडा और गाजियाबाद के डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन, मल्टी प्वाइंट और सिंगल प्वाइंट कनेक्शन विवाद, बिल्डरों की मनमानी और उपभोक्ताओं से जुड़े अन्य गंभीर मुद्दों को भी आयोग के समक्ष उठाया जाएगा। परिषद का कहना है कि जनसुनवाई में उपभोक्ताओं की समस्याओं को पूरी मजबूती के साथ रखा जाएगा, ताकि बिजली दरों के निर्धारण में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

जनसुनवाई में उठेंगे ये प्रमुख मुद्दे

• बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) और बिजली दरों का प्रस्ताव
• बिजली कंपनियों के पास 51 हजार करोड़ रुपये अधिशेष राशि का मुद्दा
• प्रदेश में लागू किए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें
• स्मार्ट मीटर के साथ लगे चेक मीटरों की मिलान रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
• नोएडा-गाजियाबाद के डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन से जुड़ी समस्याएं
• मल्टी प्वाइंट और सिंगल प्वाइंट कनेक्शन विवाद
• बिल्डरों की मनमानी और उपभोक्ताओं से जुड़े अन्य मुद्दे

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