यूपी में योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज, बंगाल चुनाव के बाद ही संभव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच फिलहाल इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां तत्काल विस्तार के पक्ष में नजर नहीं आ रही हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु सहित पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों के बाद ही योगी सरकार मंत्रिमंडल विस्तार पर निर्णय ले सकती है। सूत्रों के मुताबिक इससे पहले बिहार में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया भी पूरी होनी है। इसके बाद ही उत्तर प्रदेश में टीम योगी में बदलाव या विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और संगठन इन राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त है, इसलिए मंत्रिमंडल विस्तार कुछ समय के लिए टल सकता है। गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से करीब छह महीने पहले 26 सितंबर 2021 को भी योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार किया गया था। उस समय कुल सात मंत्रियों ने शपथ ली थी। इनमें जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था, जबकि पलटू राम, संजय कुमार गोंड, संगीता बलवंत बिंद, धर्मवीर प्रजापति, दिनेश खटीक और छत्रपाल सिंह गंगवार को राज्य मंत्री बनाया गया था।
वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कुल 53 मंत्री शपथ ले चुके हैं। इनमें से कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद अब केंद्र सरकार में मंत्री बन चुके हैं, जबकि राज्य मंत्री अनूप प्रधान वाल्मीकि लोकसभा सदस्य बन गए हैं। इस कारण मंत्रिमंडल में दो पद खाली हो गए हैं। विधायकों की संख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में अभी भी मंत्रिमंडल में नौ पद रिक्त हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा नेतृत्व इन पदों को भरने पर फैसला करेगा। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि मंत्रिमंडल का विस्तार बंगाल चुनाव के बाद ही होने की संभावना है। केंद्रीय नेतृत्व की व्यस्तता के चलते फिलहाल ऐसी स्थितियां बनती नहीं दिख रही हैं। हालाकि पार्टी के कार्यकर्तावों की नजर मंत्रिमंडल विस्तार पर लंबे समय से टिकी हुई है।
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