लाइन में उपभोक्ता, दुकानों में लगे घरेलू गैस सिलेंडर: 950 का सिलेंडर बेच रहे 1500-2000 रुपये के बीच
- राजधानी में गैस की किल्लत से रेस्टोरेंट के शटर आने लगे नीचे - गैस एजेंसियों पर बुकिंग कराने और भरे सिलेंडर के लिए लग रही गोदामों पर भीड़ -टिफिन हुए बंद, मेस से भी कारोबार थमा - कोई अधिक दाम में ले रहा सिलिंडर तो कोई एक टाइम दे रहा सेवा - हॉस्टल, पीजी व किराये पर रह रहे बाहरी छात्र व नौकरी वाले परेशान - कालाबारी व डंपिंग करने वाले सक्रिय, वसूल रहे मनमाने दाम
लखनऊ, अमृत विचार : लखनऊ में रसोईगैस सिलेंडरों के लिए बुधवार को भी लोग परेशान दिखे। गैंस एजेंसियों से लेकर डिलीवरी वैनों तक पर लंबी कतारें लगी रहीं। यही गैस कंपनियों के आईवीआरएस सिस्टम में खराबी के कारण गैस के लिए फोन पर बुकिंग तक नहीं हो पा रही है। होली से पहले बुकिंग कराने वाले उपभोक्ताओं को अभी तक सिलेंडर नहीं मिल पाए हैं।
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आरोप है कि गैस एजेंसियों ने बिना बताए बुकिंग कैंसिल कर दी है। दोबारा बुकिंग कराने के लिए कहा जा रहा है। सबसे ज्यादा समस्या इंडियन और भारत गैस कंपनी की एजेंसियों में आ रही है। एचपीसीएल में बुकिंग की समस्या नहीं है, इन एजेंसी में 4 से 5 दिन में डिलीवरी की जा रही है।
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जहां एक ओर घरेलू उपभोक्ता परेशान दिख रहे हैं, वहीं वेंडिंग जोन की रेहड़ियों, चाय की दुकानों और रेस्त्रा में घरेलू गैस के सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा है। सिलेंडर की मारामारी का फायदा उठाकर कालाबाजारी भी बढ़ गई है। घरेलू गैस सिलेंडर 1500 रुपये के ऊपर तक में बेचा जा रहा है।
छोटे सिलेंडर भरवाने हैं तो दुकानों पर रेट है 150 से 200 रुपये किलो
दूसरे प्रदेशों और अन्य जिलों से आए बड़ी संख्या में नौकरी पेशा लोग व विद्यार्थी भी शहर में रहते हैं। इनमें से ज्यादातर लोग भोजन पकाने के लिए 5 किलो के छोटे गैस सिलेंडर का उपयोग करते हैं। इन सिलेंडरों में बड़े सिलेंडरों से रीफिलिंग कर गैस भरी जाती है।
गैस की मारामारी के बीच रिफिलिंग करने वालों ने मनमाने दाम बढ़ा दिए हैं। 150 से 200 रुपये किलो तक में रीफिलिंग की जा रही है। प्राइवेट कंपनी में गार्ड की नौकरी करने वाले अनिल कुमार ने बताया कि साइकिल बुधवार दोपहर लालबाग क्षेत्र में 5 किलो का गैस सिलेंडर भराने निकले थे। दुकानदार प्रति किलो 150 से 2000 रुपये से ज्यादा मांग रहे थे।
सिमटने लगा खान-पान का कारोबार
गैस सिलेंडर की किल्लत का असर खान-पान के कारोबार पर पड़ने लगा है। खान-पान की जो दुकानें लगभग 24 घंटे चलती थी वे अब कारोबार समेटने में लगे हैं। 1090 चौराहे के पास चटोरी गली में करीब 40 खान-पान की दुकानें बंद हो गई हैं। इसके अलावा कई रेस्टोरेंट संचालक बंदी की तैयारी कर रहे हैं।
हिमालय फास्ट फूड के संचालक ने बताया कि कॉमर्शियल सिलेंडर खत्म हो गया है। घरेलू सिलेंडर मिल जाए तो काम चल जाएगा। नहीं तो रेस्टोरेंट कुछ समय के लिए बंद करना पड़ेगा। मिश्रा भोजनालय के संचालक ने बताया कि होली से पहले के भरे हुए कॉमर्शियल सिलेंडर से काम चल रहा है।
एक हफ्ते में स्थिति सामान्य नहीं हुई तो काम बंद करना पड़ेगा
- बड़े होटलों पर छाया गैस का संकट
-कई रेस्टोरेंट बंद होने की ओर
-गैस एजेंसी पर नहीं मिल रहा सिलेंडर
-कमर्शियल गैस नहीं आ रही- गैस एजेंसी
-गैस नहीं मिल रही रेस्टोरेंट को कैसे खोलेंगे
-लखनऊ की मशहूर बृज की रसोई पर भी खानपान सेवा थमी।
एडीएम और डीएसओ टीम के साथ फील्ड पर निकले
गैस सिलेंडर की आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए बुधवार को एडीएम आपूर्ति ज्योति गौतम और डीएसओ विजय प्रताप सिंह टीम के साथ गैस एजेंसियों का निरीक्षण करने फील्ड पर निकले। लालबाग इंडेन गैस सहित उन्होंने कई गैस एजेंसियों में संचालकों और कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए। एडीएम ने कहा कि उपभोक्ताओं को बुकिंग के लिए बोर्ड में फोन नंबर प्रदर्शित किए जाएं। इसके अलावा एजेंसी में स्टॉक रजिस्टर और बैकलॉग की जानकारी ली।
अब घर-घर नहीं पहुंच रहा ''डिब्बे वाला''
शहर में बाहर से आने वाले इन ''हॉस्टलर'' की बड़ी संख्या है। नरही, जियामऊ, बालू अड्डा, डालीबाग, हजरतगंज, डालीगंज, बलरामपुर, केजीएमयू, पुराना लखनऊ समेत तमाम इलाकों में इन्हीं डिब्बे वालों का बोलबाला रहता है। लेकिन गैस संकट ने इन पर असर डाल दिया है। कई जगह पर मेस, फास्ट फूड दुकानें और ठेले बंद हो गए हैं। इन इलाकों में सबसे ज्यादा हॉस्टल, पीजी और किराये पर मकान संचालित हैं। जहां विद्यालय, इंस्टिट्यूशन और कोचिंग में पढ़ाई करने वाले सबसे ज्यादा बाहर के छात्र-छात्राएं रहते हैं। इनके अलावा बाहर के नौकरी-पेशा वाले भी रहते हैं। जो आसपास होटल, मेस, फास्टफूड दुकानें, रेस्टोरेंट और टिफिन के सहारे हैं। इनमें काफी बंद कर दिए हैं। इससे बाहरी लोगों के लिए खानपान का संकट गहरा गया है।
छोटे दुकानदारों ने बढ़ाए दाम, जानिए रेट लिस्ट
-10 की चाय -12 रुपये
-12 की -15 रुपये में
-टिफिन-50, 60 और 70 में 10 रुपये की बढ़ोतरी
-फास्ट फूड में 5 से 10 रुपये बढ़े
-छोला-पूडी, छोला चावल में 10 रुपये बढे़
-छोल भटूरा- 40 से बढ़कर 50 रुपये
इस ओर ध्यान दें जिम्मेदार तो मिलेगी राहत
विभागीय दावों में घरेलू सिलेंडर की भले ही सार्टेज न हो लेकिन, क्षेत्रों में किल्लत बढ़ती जा रही है और बुकिंग के बाद भी आम उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल रही है। इसकी वजह कालाबाजारी, डंपिंग, ओवररेटिंग और रीफिलिंग करने वाले सक्रिय हो गए हैं। जो घरेलू सिलेंडर महंगे दामों में ठेले, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, स्वीट् हाउस, शादी-पार्टी के लिए कैर्ट्स आदि को बेच रहे हैं।
कई जगह घरेलू सिलेंडर से रीफिलिंग का अवैध धंधा और जोरों पर हो गया है। इसलिए घरेलू सिलिंडर की उपलब्धता कम हो रही है। यदि ऐसा नहीं है तो आखिरकार यह दुकानें कहां से चल रही है? जबकि कामर्शियल सिलेंडर की तो उपलब्धता ही नहीं है। कैर्ट्स चाय की दुकान, मेस, होटल, रेस्टोरेंट आदि जगह कामर्शियल की जगह घरेलू सिलिंडर धड़ल्ले से इस्तेमाल होते देखे जा सकते हैं। इस वजह से घरेलू सिलिंडर की समस्या गंभीर हो रही है।
खाद्य तेल भी उछले
युद्ध की विभीषिका का असर खाद्य तेलों के आयात पर भी पड़ा है। खाद्य तेल के दाम भी उछल गए हैं। थोक बाजार में ही सरसों के तेल में 30 से 35 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। वहीं, रिफाइंड में 30 और पॉम ऑयल में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। कारोबारी बताते हैं कि बाजार में माल ही नहीं है, जिसकी वजह से यह महंगे हुए हैं। सिटी स्टेशन सुभाष मार्ग के संजय सिंघल बताते हैं कि थोक बाजार में 130 रुपये वाला सरसों तेल 30 रुपये बढ़कर 160 रुपये के ऊपर निकल गया है। 140 वाला सोया रिफाइंड 170 से 175 रुपये लीटर पहुंच गया है। वहीं, 140 वाला पॉम ऑयल 155 से 160 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
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