कानपुर : धूम्रपान से न सिर्फ फेफड़ें, बल्कि कम उम्र में सिर की नस भी हो रही कमजोर

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर व आसपास के जिलों में 50 फीसदी से अधिक लोग कर रहें धूम्रपान का सेवन

कानपुर, अमृत विचार। कानपुर और आसपास के जिलों में सिगरेट, तंबाकू व गुटखा का सेवन 50 फीसदी से ज्यादा लोग कर रहे हैं, जिनमे बच्चे, युवा, अधेड़, बुजुर्ग, महिलाएं व युवतियां भी शामिल हैं। इस वजह से लोगों में न सिर्फ अस्थमा की समस्या बढ़ रही है, बल्कि जिस उम्र में शरीर की ग्रोथ होती है, उस उम्र में किशोरों व युवाओं के सिर की नस भी कमजोर हो रही है।

इसलिए लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष मार्च के दूसरे सप्ताह में धूम्रपान निषेध दिवस मनाया जाता है, ताकि वह धूम्रपान से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक होकर इनसे दूर रहें। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं, जिसको स्मोकिंग की वजह से सांस लेने और अस्थमा की समस्या हो जाती हैं।

आंकड़ों के अनुसार, कानपुर जैसे औद्योगिक शहरों में वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में अस्थमा के लक्षणों की शीघ्र पहचान और नियमित इलाज अत्यंत आवश्यक है। मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल के विभागाध्यक्ष डॉ.अवधेश कुमार ने बताया कि बीते वर्षों के मुकाबले सांस की बीमारियां प्रदूषण, सिगरेट व तंबाकू की वजह से बढ़ी है और इसकी रोकथाम व उपचार में दवाओं के साथ सिगरेट व तंबाकू का कंट्रोल भी बहुत जरूरी है।

क्योंकि अस्थमा एक गंभीर लेकिन नियंत्रित करने योग्य बीमारी है। सही समय पर बीमारी की पहचान होने, नियमित इनहेलर उपयोग और ट्रिगर से बचाव से रोगी सामान्य जीवन जी सकते हैं। लेकिन इसके बाद भी रोगी अगर सिगरेट व तंबाकू का सेवन करता है तो स्थिति और भी घातक हो जाती है। वहीं, कम उम्र में इनके सेवन से रोगी को आजीवन इनहेलर के सहारे जीवन तक बीताना पड़ सकता है। क्योंकि इनहेलर भविष्य के अटैक से बचाने में सहायक होता है। 

हुक्का व स्मोकिंग दोनों नुकसानदायक 

काकादेव स्थित दि पनेशिया हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ.विकास शुक्ला के मुताबिक कुछ माह पहले कक्षा आठ में पढ़ने वाला एक बच्चा आया था, जिसके सिर में दर्द के साथ ही उसको चलने-फिरने और कुछ भी खाने में दिक्कत हो रही थी। जब बच्चे की हिस्ट्री ली गई तो जानकारी हुई कि बच्चे ने काफी मात्रा में घरवालों से छुपकर हुक्का के सेवन की जानकारी हुई। हुक्का न मिलने पर वह स्मोकिंग करने लगा। हॉस्पिटल में जांच कराने पर पता चला कि बच्चे की वह नस ब्लॉक हो गई है, जो हाथ, पैर, आवाज, कान आदि को कंट्रोल करती है और याददाश्त मजबूत करती है। उस ब्लॉक नस को दुरस्त करने के लिए बच्चे का इलाज किया गया, इसके बाद वह अब स्वस्थ है। कहा कि जो उम्र शरीर ग्रोथ करने की होती है, उस उम्र में बच्चों का धम्रपान की वजह से सिर कमजोर हो रहा है। ऐसे में जागरूकता बहुत जरूर है।

ऐसे करें बचाव...
  1. नशा छोड़ने की एक निश्चित तारीख तय करें।
  2. उन स्थानों, लोगों या आदतों से दूर रहें, जो आपको धूम्रपान की याद दिलाते हैं।
  3. धूम्रपान की लत कम करने के लिए निकोटीन गम, पैच, इनहेलर या स्प्रे का उपयोग करें।
  4. धूम्रपान छोड़ने के लिए डॉक्टर की सलाह पर कुछ दवाएं भी ले सकते हैं।
  5. सिगरेट की तलब लगने पर हेल्दी स्नैक्स जैसे फल (सेब, संतरा) या सब्जियां खाएं।
  6. घर, कार और कपड़ों से सिगरेट की गंध (राख, बट) को साफ करें।
  7. सांस लेने के व्यायाम करें, जो फेफड़ों को स्वस्थ बनाते हैं।
  8. तनाव ग्रस्त रहने की बजाय खुद को तनाव मुक्त रहें और दूसरें को भी खुश रखें।

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