कानपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई : कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले में एक और आरोपी को किया गिरफ्तार
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में कोडीनयुक्त कफ सिरप और एनडीपीएस श्रेणी की नशीली दवाओं के अवैध भंडारण व तस्करी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क का खुलासा किया है और एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी फर्मों के माध्यम से भारी मात्रा में दवाओं की आपूर्ति एवं विभिन्न जिलों में तस्करी का खुलासा हुआ है। इस मामले में मुख्य अभियुक्त विनोद अग्रवाल पहले ही कानपुर जेल में निरुद्ध है, जबकि प्रकरण में अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस उपायुक्त अपराध श्रवण कुमार सिंह ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों को बताया कि पुलिस आयुक्त के निर्देश पर अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। मामला कलक्टरगंज थाना क्षेत्र का है, जहां मेसर्स अग्रवाल ब्रदर्स, बिरहाना रोड स्थित फर्म में भारी मात्रा में कोडीन, ट्रामाडोल, टैपेन्टाडोल और अल्प्राजोलाम युक्त दवाओं का भंडारण और बिक्री पाए जाने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया था।
औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीम ने 11 जुलाई 2025 को फर्म का निरीक्षण किया था, जिसमें यह पाया गया कि एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं का असामान्य रूप से बड़े पैमाने पर क्रय-विक्रय किया जा रहा था। जांच के दौरान कुल 47 फर्मों को भेजे गए सत्यापन पत्रों में से 21 फर्मों के पते गलत पाए गए या वे अस्तित्व में ही नहीं मिलीं, जिससे फर्जी फर्मों के माध्यम से दवाओं की आपूर्ति किए जाने की पुष्टि हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्म ने लैबोट्री फार्माक्यूटिकल्स इंडिया लि से कोडीन युक्त 'इस्कफ' कफ सिरप की 89 हजार 600 बोतलें खरीदकर एक ही बिल के माध्यम से प्रयागराज स्थित एम.के. हेल्थकेयर को बेच दी थीं, जो संदिग्ध पाया गया। बाद में जांच के दौरान फर्म से बिलिंग में प्रयुक्त कंप्यूटर और लैपटॉप भी हटा दिए गए, जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ का संदेह पैदा हुआ।
मामले में गिरफ्तार आरोपी प्रभात खरे से पूछताछ में खुलासा हुआ कि विनोद अग्रवाल और उनके पुत्र शिवम अग्रवाल ने उसकी पत्नी के नाम से "ध्रुव फार्मास्युटिकल्स" नामक फर्म खुलवाकर कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी कराई। फर्जी बिल बनाकर दवाओं को ट्रांसपोर्ट के माध्यम से सीतापुर, लखीमपुर खीरी और बहराइच सहित कई जिलों में भेजा जाता था, जहां इन्हें नशे के रूप में उपयोग करने वालों को ऊंचे दामों पर बेचा जाता था।
पुलिस के अनुसार आरोपी के मोबाइल फोन से फर्जी बिलों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता और एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच जारी है। श्रवण कुमार ने कहा कि नशीले कफ सिरप के इस कारोबार में पुलिस एक सप्ताह में पहली लेयर से जुड़े कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी कर लेगी जिसके बाद दूसरी और तीसरी लेयर के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाया जायेगा। उन्होने कहा कि अवैध मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इसमें शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
