बरेली: विदेशी सह सुपरवाइजर भी चुन सकेंगे शोधार्थी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। शोध छात्रों के लिए विश्वविद्यालय ने नई व्यवस्था शुरू की है। अब शोधार्थी भारतीय सुपरवाइजर के साथ-साथ विदेशी सह सुपरवाइजर भी चुन सकेंगे। शोध समन्वयक की बैठक में इसका भी फैसला लिया गया। इस बैठक में रिसर्च को लेकर कई अन्य भी निर्णय लिए गए थे। विश्वविद्यालय में मंगलवार से शोध प्रवेश …

बरेली, अमृत विचार। शोध छात्रों के लिए विश्वविद्यालय ने नई व्यवस्था शुरू की है। अब शोधार्थी भारतीय सुपरवाइजर के साथ-साथ विदेशी सह सुपरवाइजर भी चुन सकेंगे। शोध समन्वयक की बैठक में इसका भी फैसला लिया गया। इस बैठक में रिसर्च को लेकर कई अन्य भी निर्णय लिए गए थे। विश्वविद्यालय में मंगलवार से शोध प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के साक्षात्कार भी शुरू हो गए। मंगलवार को राजनीति शास्त्र के अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। बुधवार को इतिहास के अभ्यर्थियों के साक्षात्कार होंगे। वर्ष 2019 की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने बाद अगले सत्र की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

विश्वविद्यालय में रिसर्च सेल के प्रभारी डा. सुधीर कुमार ने बताया कि नए शोध अध्यादेश के तहत कई व्यवस्था की गई हैं। शोध की थीसिस का मूल्यांकन विदेशी प्रोफेसर कर सकेंगे। साथ ही अब शोधार्थी विदेशी प्रोफेसर को अपना सह सुपरवाइजर भी चुन सकेंगे। यानी वह किसी विदेशी सुपरवाइजर के अंतर्गत अपनी शोध कर सकेंगे। शोधार्थी का मुख्य सुपरवाइजर विश्वविद्यालय का ही प्रोफेसर होगा। इसके अलावा वह आईवीआरआई समेत देश के 300 सरकारी संस्थानों के सुपरवाइजर के अंतर्गत भी शोध कर सकेंगे। नए अध्यादेश के तहत विश्वविद्यालय ने शोध प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।

विश्वविद्यालय ने शोध की प्रवेश प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है। एक-एक कर सभी अभ्यर्थियों के साक्षात्कार शुरू करा दिए गए हैं। मंगलवार को राजनीति शास्त्र के 48 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। जिसमें 3 ने रुहेलखंड की पीएचडी प्रवेश परीक्षा पास की है और 45 नेट व जीआरएफ परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी हैं। बुधवार को प्राचीन इतिहास एवं सस्कृति या इतिहास के 84 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है। इनमें 14 अभ्यर्थियों ने रुहेलखंड प्रवेश परीक्षा पास की थी व 70 अन्य हैं। विश्वविद्यालय में 319 पीएचडी सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू की गई है।

महाविद्यालय स्तर पर शोध योजना होगी स्थापित
विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध महाविद्यालयों में शिक्षा के स्तर बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चालू की जा रही हैं। शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार, शैक्षणिक तकनीक और बेहतर पाठ्यचर्या के स्तर और छात्रों को उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त हो, इसके लिए शिक्षकों के लिए शोध और विकास योजना शुरू की गई। शिक्षकों को नए-नए विषयों पर शोध करनी होगी। शोध के आधार पर पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया जाएगा। यह योजना महाविद्यालय या विभाग स्तर पर स्थापित की जाएगी। योजना के तहत शिक्षकों को शोध करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जाएगी। शिक्षक को प्रमुख शोधकर्ता के रूप में योजना के तहत आवेदन करना होगा। उसके साथ में एक सहायक शिक्षक का होना अनिवार्य होगा। शासन ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

शोध व विकास योजना विश्वविद्यालय या महाविद्यालयों के स्थायी शिक्षकों के लिए ही है। इस योजना के तहत युवा और शोध में प्रमाणित रूप से सक्रिय शिक्षकों को ही वरीयता दी जाएगी। एक समय में एक ही शोध की अनुमति होगी। शोध की सम्पूर्ण जवाबदेही प्रमुख शोधकर्ता या फिर संस्थान के प्रमुख की होगी। एक शोध पूरी होने के बाद शिक्षक दूसरी शोध कर सकता है लेकिन दो वर्ष का अंतराल होना जरूरी होगा। शोध कार्य से कम से कम दो पेपर शोध पत्र में प्रमुख शोधकर्ता को प्रकाशित करने होंगे। सिर्फ उन्हीं विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों के प्रस्ताव स्वीकार होंगे जिनके यहां शोध कार्य करने की पर्याप्त सुविधाएं होंगी।

ऐसे शिक्षक जो आवेदन करने की अंतिम तिथि से तीन वर्ष की अवधि में सेवानिवृत्त हो रहे हैं तो वह आवेदन नहीं कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश के विशेष के संदर्भ और भारतीय संस्कृति एवं विरासत, स्वास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा तकनीक पर किए गए शोध को वरीयता दी जाएगी। सभी शोध प्रोजेक्ट कम से कम 3 वर्ष की अवधि के होंगे। इसके तहत वृहद और लघु शोध योजनाएं संचालित होंगी। इनके तहत शिक्षक के शोध के अनुभव के आधार पर प्रस्ताव मांगे जाएंगे और उसी आधार पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

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