ईरान के दो ऊर्जा केंद्रों पर हमला: ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम पूरा, फिर भी तनाव चरम पर
तेहरान/वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खोलने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम की समय सीमा सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन ठीक उसी दौरान ईरान के दो महत्वपूर्ण ऊर्जा सुविधाओं पर हवाई हमलों की खबर आई है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज (आईआरजीसी से जुड़ी) ने मंगलवार तड़के दावा किया कि इस्फहान और खोर्रमशहर में गैस से जुड़ी दो सुविधाओं को निशाना बनाया गया।
इस्फहान में एक प्राकृतिक गैस प्रशासन भवन और गैस दबाव कम करने वाली स्टेशन पर हमला हुआ, जिसमें सुविधाओं के कुछ हिस्सों और आसपास के घरों को नुकसान पहुंचा। वहीं खोर्रमशहर में बिजली संयंत्र को सप्लाई करने वाली गैस पाइपलाइन को टारगेट किया गया, हालांकि स्थानीय गवर्नर के अनुसार प्रोजेक्टाइल स्टेशन के बाहर गिरी और कोई हताहत नहीं हुआ।
अभी तक न तो अमेरिका ने और न ही इजरायल ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि क्या ये हमले विशेष रूप से इन सुविधाओं पर किए गए थे या आसपास के क्षेत्रीय हमलों का हिस्सा थे।
ट्रंप का अल्टीमेटम और 5 दिन की मोहलत
इससे पहले शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी धमकी के पूरी तरह नहीं खोलता तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को “obliterate” (नष्ट) कर देगा—और सबसे बड़े से शुरू करेगा। उन्होंने 48 घंटे की सख्त डेडलाइन दी थी।
मंगलवार को ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के एक “सम्मानित” नेता से बातचीत की है और शांति समझौते की संभावना है। उन्होंने हमलों पर 5 दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी और युद्ध समाप्त करने के संकेत दिए। लेकिन ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि ट्रंप फेक न्यूज फैला रहे हैं—कोई बातचीत नहीं हुई।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों जरूरी
दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करता है तो वह इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर देगा और तब तक नहीं खोलेगा जब तक क्षतिग्रस्त सुविधाएं दोबारा नहीं बन जाएंगी।
ईरान ने आगे धमकी दी है कि वह क्षेत्र के अमेरिकी और इजरायली ऊर्जा व डेसालिनेशन प्लांट्स को भी निशाना बना सकता है।
वर्तमान में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। एक तरफ ट्रंप युद्ध समाप्त करने और बातचीत की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ ईरान हमलों का दावा कर रहा है और जवाबी कार्रवाई की तैयारी में दिख रहा है। इन घटनाओं से वैश्विक तेल और गैस की कीमतों पर भी असर पड़ रहा है।
