उजागर हुआ बड़ा खेल : फर्जी वेबसाइट के जरिये यूपी बोर्ड की जाली सर्टिफिकेट तैयार करने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने यूपी बोर्ड की फर्जी वेबसाइट के जरिये मार्कशीट्स, सर्टिफिकेट, रजिस्ट्रेशन एवं ट्रांसफर सर्टिफिकेट तथा वेरीफिकेशन प्रपत्र तैयार करने वाले गिरोह के 2 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए सदस्यों के पास से एसटीएफ ने फर्जी मुहर सहित इस्तेमाल में आने वाले उपकरण व अन्य जाली दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार किए गए सदस्यों की पहचान शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा उर्फ शनि पुत्र हरिशंकर राय, निवासी ग्राम व पोस्ट सुहौली, मनीष कुमार राय पुत्र महेन्द्र राय निवासी ठेकमा, बरदह, आजमगढ़ के तौर पर हुई है।एसटीएफ के मुताबिक माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती बेवसाइट बनाकर गिरोह के सदस्यों को ठगते थे।
इस बावत परिषद की तरफ से प्रयागराज में मुकदमा दर्ज कराकर एसटीएफ से जांच कराने की मांग की गई थी। इसी क्रम में उपनिरीक्षक नरेन्द्र सिंह, उपनिरीक्षक नितिन यादव की टीम अभिसूचना संकलन के क्रम में जनपद आजमगढ़ में भ्रमणशील थी। इस दौरान विश्वनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह का सरगना शशि प्रकाश राय है जो अपने घर पर मौजूद है।
इस सूचना पर एसटीएफ टीम द्वारा उपरोक्त दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्त शशि प्रकाश राय ने पूछताछ पर बताया कि वह दिल्ली से B.Sc किया है। इसका एक गिरोह है, जो विभिन्न प्रकार के फर्जी / कूटरचित दस्तावेज तैयार करता है। इसके पहले यह आगरा में भी काम कर चुका है। वर्ष 2022 में जनपद जौनपुर में एक काल सेन्टर खोला, जिसमें सोशल मीडिया के माध्यम उपरोक्त दस्तावेज बनाने आदि का पोस्ट डाला जाता था।
जिस पर लोगों द्वारा इनसे सम्पर्क किया जाता था। जिसके बाद शशि प्रकाश द्वारा अपने ममेरे भाई मनीष कुमार राय को आवश्यकता अनुसार डिटेल बताया जाता था। बताये हुए डिटेल के अनुसार मनीष राय द्वारा उपरोक्त फर्जी दस्तावेज तैयार किया जाता था। इनके द्वारा बनाई गयी फर्जी बेवसाइट पर कूटरचित मार्कशीट का रिजल्ट भी अपलोड कर दिया जाता था, जिससे लोग बेबसाइट पर रोल नंबर डालकर रिजल्ट ऑनलाइन चेक करते थे, जो वह दस्तावेज (शिक्षा बोर्ड / यूनिर्वसिटी) असली प्रतीत होता था।
इतना ही नही फर्जी मार्कशीट के आधार पर लोग विभिन्न संस्थानों में नौकरी पा जाते है तो उनका ऑनलाइन / ऑफलाइन वेरीफिकेशन भी कर देता था। फर्जी मार्कशीट व अन्य प्रपत्र आदि बनवाने के लिये 15 से 20 हजार लेता था। जिसे सभी लोग आपस में बांट लेते थे। लोगों को फर्जी दस्तावेज कोरियर के माध्यम से भेजते थे। अब तक लगभग 6-7 हजार से अधिक विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार किया जा चुका है।
