Bareilly : बढ़ती जा रही फीस, जिला शुल्क समिति की दो साल से बैठक नहीं

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
On

बरेली, अमृत विचार। निजी स्कूलों में हर साल बढ़ रही फीस और मनमानी पर रोक के लिए कागजों पर बहुत कुछ है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। हर साल नया सत्र शुरू होते हीपर महंगे सिलेबस का शोर मचता है लेकिन एक माह बाद सब शांत हो जाता है। स्कूलों पर नकेल कसने के लिए जो समिति बनी है उसकी बैठक दो साल से नहीं हुई है।

जानकारी के मुताबिक हर स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले अभिभावकों की समिति को बताना होता है कि वह फीस बढ़ाने जा रहे हैं। लेकिन ऐसे तमाम निजी स्कूल है जहां अभिभावकों की कोई समिति ही नहीं है। वहीं, 2018 में प्रदेश में जिला स्तर पर जिला शुल्क समिति बनाई गई थीं। इस समिति की 2023-2024 में अंतिम बैठक हुई। उसके बाद से अब तक कोई बैठक नहीं हुई है। इससमिति में जिले के बढ़े अफसर जुड़े होते हैं जिनकी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को आमने-सामने बैठाकर समस्याएं दूर करना है। लेकिन दो सालों से कोई बैठक नहीं हुई। इसका नुकसान अभिभावकों को हो रहा है। मध्यम वर्ग सबसे अधिक परेशान है।


स्कूलों ने फिर बढ़ा दी फीस
दुर्गा नगर की रेखा ने बताया कि उनकी बेटी एक निजी स्कूल में कक्षा चार में आई है। इस साल फीस में एक हजार रुपये से अधिक बढ़ गए हैं। उन्होंने अभी तीन माह की फीस जमा की है जो 11500 रुपये है। पिछले सत्र में तीन माह की फीस 10200 के लगभग जमा करती थीं। सनराइज कॉलोनी निवासी आशा शिक्षिका हैं। उनका बेटा एक निजी स्कूल में पढ़ता है। वह कक्षा पांच में आया है। उनके बेटे की फीस भी इस सत्र में 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ा दी गई है। उन्होंने जब स्कूल में जाकर विरोध किया तो उनसे कहा गया सब अभिभावक फीस देने को तैयार है तो आपको क्या दिक्कत है।

पुस्तक विक्रेता सुधीर गोयल ने बताया कि कॉपी किताबों में तीन से चार प्रतिशत के लगभग ही दाम बढ़े हैं। प्राइवेट पब्लिसर की प्रिंटिंग और पेपर की कॉस्ट अधिक होती है, इसलिए उनकी किताबों के दाम अलग होते हैं।

जिला शुल्क समिति अभिभावक प्रतिनिधि अंकुर सक्सेना ने बताया कि जिला शुल्क समिति की बैठक बेहद आवश्यक है। स्कूलों में फीस बढ़ोतरी जरूरी है या नहीं, इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। समिति के सचिव डीआईओएस को बैठक बुलानी चाहिए, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करते हैं। यह भी जांच हो कि स्कूलों ने नए सत्र से तीन महीने पहले नियमानुसार पूरी जानकारी वेबसाइट पर डाली या नहीं।

 

संबंधित समाचार