LPG की मार: केजीएमयू की कैंटीन में बढ़ गए भोजन के दाम, दस रुपये तक महंगा हुआ खाना
गैस संकट और बढ़ती लागत का असर, छोले-चावल से लेकर चाय-नाश्ते तक महंगा
लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की कैंटीनों में भोजन करने वाले मरीजों, तीमारदारों और मेडिकल छात्र-छात्राओं पर महंगाई की मार पड़ रही है। कॉमर्शियल गैस संकट और लगातार बढ़ती कीमतों के चलते कैंटीन संचालकों ने भी खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ा दिए हैं।
हालांकि खाद्य पदार्थों पर महंगाई का आलम केवल विश्वविद्यालय कैंपस तक ही सीमित नहीं है। बाहर भी कुछ यही हाल है। बाजार में भी हर भोजन के दाम बढ़ गए हैं।
प्रशासनिक भवन के पास स्थित कैंटीन में बुधवार से छोले-चावल की प्लेट 10 रुपये महंगी कर दी गई है। पहले यह 40 रुपये में मिलती थी, जो अब 50 रुपये में उपलब्ध है। इसी तरह नेत्र रोग विभाग के पास स्थित कैंटीन में छोले-चावल की कीमत 60 रुपये कर दी गई है, जबकि पैकिंग कराने पर 70 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। कैंटीन संचालकों का कहना है कि गैस, कच्चे माल और अन्य खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण संचालन मुश्किल हो गया था।
मजबूरी में उन्हें दाम बढ़ाने पड़े। इससे पहले भी कैंटीनों में चाय के दाम में 2 रुपये और समोसे में 3 रुपये की बढ़ोतरी की जा चुकी है। अब आलू सैंडविच, बटर मैगी, पनीर पराठा और बन-समोसा जैसे भट्टी पर बनने वाले अन्य खाद्य पदार्थ भी महंगे हो गए हैं।
महंगाई के इस असर से सबसे अधिक परेशानी गरीब मरीजों और उनके तीमारदारों को हो रही है, जो पहले से ही इलाज के खर्च से जूझ रहे हैं। वहीं छात्रों को भी रोजमर्रा के खर्चों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है।
