Uttrakhand: मानसिक व शारीरिक रूप से जॉम्बी बना रहा केमिकल्स कॉकटेल

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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हल्द्वानी, अमृत विचार। दुनिया भर में तेजी से फैल रहा ‘जॉम्बी ड्रग’ अब सिर्फ एक नशा नहीं बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है। जांच में सामने आया है कि इस खतरनाक ड्रग को जाइलाजीन से तैयार किया जा रहा है, जिसे मूल रूप से जानवरों को बेहोश करने के लिए बनाया गया था। 

अब इसे अवैध नशे के रूप में धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि यह किसी एक विशेष दवा का नाम नहीं है, बल्कि यह नशीले पदार्थों के लिए प्रयोग किया जाने वाला एक बोलचाल का शब्द है जो इंसान को मानसिक और शारीरिक रूप से जॉम्बी जैसी स्थिति में पहुंचा देते हैं।

अगर समय रहते सतर्कता न बरती गई तो आने वाले समय में उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं रहेगा। दरअसल, उत्तराखंड में स्मैक की तस्करी बड़े पैमाने पर की जाती है। ऐसे में एक पर्यटन प्रदेश होने के नाते इस ड्रग के यहां पहुंचने के संभावना भी प्रबल है। आईजी रिद्धिम अग्रवाल का कहना है कि नशे के खिलाफ पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। अभी इस तरह का मामला प्रकाश में तो नहीं आया है, लेकिन हमारी नजर ऐसी गतिविधियों पर बनी हुई है।

याद दिला दें कि लगभग एक माह पहले इस ड्रग से जुड़ा मामला चंढीगढ़ में सामने आया था। सेक्टर 33बी में डिलीवरी ब्वॉय करीब दो से ढाई घंटे तक बिना हिले-डुले खड़ा रहा। वह बेसुध सा लग रहा था, उसकी आंखें टकटकी लगाए थीं और शरीर एक ही जगह जमा हुआ था।

आसपास के लोगों ने पहले तो इसे नजरअंदाज कर दिया, यह सोचकर कि वह बस इंतजार कर रहा है या आराम कर रहा है, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ चिंता बढ़ने लगी। डिलीवरी ब्वॉय एक खड़ी कार के पीछे स्थिर खड़ा रहा। मिनट बीत गए। फिर एक घंटा। फिर दो घंटे और वह अपनी जगह से हिला तक नहीं। बाद में पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया।

जानकार बताते हैं कि यह कोई एक ड्रग नहीं बल्कि कई खतरनाक केमिकल्स का मिश्रण है, जिसे जानवरों को बेहोश करने वाली दवा जाइलाजीन (सिंथेटिक ओपिओइड), हेरोइन और फेंटेनिल से मिलाकर तैयार किया जाता है। अमेरिका से निकल भारत तक पहुंचे इस ड्रग को अमेरिका में “ट्रैंक डोप” नाम से जाना जाता है।

कहां से आ रहा है सप्लाई नेटवर्क?
हल्द्वानी : पड़ताल में सामने आया है कि इस सप्लाई नेटवर्क की एक बड़ी वजह वेटरनरी सप्लाई से लीकेज है। जाइलाजीन एक वैध पशु-चिकित्सा दवा है। इसे चोरी, फर्जी लाइसेंस या ब्लैक मार्केट के जरिए ड्रग नेटवर्क तक पहुंचाया जाता है। इसकी आसान उपलब्धता और सस्ती कीमत, इसे माफिया के लिए एक मुनाफे वाला कारोबार बनाती है। खास बात यह है कि इस उपयोग करने वाला बेहद कम समय में इसका लती हो जाता है।

लेकिन अभी तक नहीं हुई है पुष्टि
हल्द्वानी: चंढीगढ़ में डिलीवरी ब्वॉय का वीडियो पूरे भारत में तेजी से वायरल हुआ था। वायरल दावों के बावजूद, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि इसमें किसी ड्रग का हाथ था। विशेषज्ञों और कुछ उपयोगकर्ताओं ने सावधानी बरतने की सलाह दी है, उनका कहना है कि ऐसा व्यवहार किसी मेडिकल इमरजेंसी, न्यूरोलॉजिकल समस्या या अत्यधिक थकान के कारण भी हो सकता है।

 

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